पटना का बिहार म्यूजियम बना एशिया का नंबर 1, दुनिया में भी लहराया परचम

पटना के बिहार म्यूजियम ने रचा इतिहास! 'वर्थ अ जर्नी' की लिस्ट में यह एशिया का सर्वश्रेष्ठ और दुनिया का नौवां सबसे अच्छा म्यूजियम बना है।

Ghazala Saheb2 November 20262 min read0 viewsBihar
पटना का बिहार म्यूजियम बना एशिया का नंबर 1, दुनिया में भी लहराया परचम

पटना स्थित बिहार म्यूजियम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 'वर्थ अ जर्नी' (Worth A Journey) द्वारा जारी 'दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालय 2026' की सूची में बिहार म्यूजियम एशिया में नंबर वन बन गया है। वैश्विक स्तर पर भी इसे नौवां स्थान मिला है, जो बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया के सामने गर्व से पेश करता है।

वैश्विक पटल पर चमकी बिहार की विरासत

इस शानदार सफलता पर शिक्षाविद् और लेखक डॉ. बीरबल झा ने बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, बिहार म्यूजियम के महानिदेशक (सेवानिवृत्त) अंजनी कुमार सिंह और म्यूजियम के समस्त कर्मचारियों को बधाई दी है। डॉ. झा ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य के संस्थानों के कुशल और पेशेवर प्रबंधन को दिया है।

म्यूजियम में बिहार के गौरवशाली इतिहास को बहुत ही खूबसूरती से संजोया गया है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख आकर्षण शामिल हैं:

  • प्राचीन ज्ञान के केंद्र: नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय की विरासत।
  • मौर्य काल: मौर्य साम्राज्य की ऐतिहासिक कलाकृतियां।
  • सांस्कृतिक संगम: प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक की प्रदर्शनियां।

कौशल विकास ने बढ़ाया म्यूजियम का मान

म्यूजियम की इस वैश्विक सफलता के पीछे कर्मचारियों के कौशल विकास का भी बड़ा हाथ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के साथ बेहतर संवाद करने के लिए ब्रिटिश लिंगुआ (British Lingua) द्वारा म्यूजियम के अधिकारियों और स्टाफ के लिए एक विशेष स्पोकन इंग्लिश ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया गया था।

"म्यूजियम केवल कलाकृतियों के संग्रह का स्थान नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक जीवंत केंद्र है। संचार कौशल में सुधार ने यहां के स्टाफ के आत्मविश्वास को बढ़ाया है, जो इस वैश्विक सम्मान के लिए महत्वपूर्ण रहा।" — डॉ. बीरबल झा

म्यूजियम के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद कर्मचारियों की संचार क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। यह उपलब्धि न केवल बिहार के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि यह राज्य को सांस्कृतिक पर्यटन के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।

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