बिहार में हवाई क्रांति! सोनपुर और भागलपुर में बनेंगे दो नए एयरपोर्ट

बिहार के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। प्रदेश में हवाई सेवाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर (अजगैबीनाथ धाम) क्षेत्र में दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे। इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने कुल 7,373 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है।
10,000 करोड़ रुपये का मेगा प्रोजेक्ट
इन दोनों नए एयरपोर्टों का विकास पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 10,000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया गया है। इस भारी-भरकम बजट का बंटवारा इस प्रकार किया गया है:
- सोनपुर एयरपोर्ट: इसके विकास के लिए लगभग 6,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
- भागलपुर-मुंगेर (अजगैबीनाथ धाम) एयरपोर्ट: इस सुविधा के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
राज्य सरकार इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और कनेक्टिविटी से जुड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण का पूरा खर्च वहन करेगी।
सोनपुर और भागलपुर के लिए जमीन का गणित
इस बड़े प्रोजेक्ट का सीधा असर हजारों परिवारों पर पड़ेगा। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, दोनों साइटों पर लगभग 26,000 से अधिक भूस्वामियों (रैयतों) को प्रभावित होने की संभावना है।
1. सोनपुर एयरपोर्ट (सारण जिला)
सोनपुर में बनने वाले एयरपोर्ट के लिए सारण जिले में लगभग 4,228 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। इस प्रक्रिया से 26 गांवों के करीब 14,224 भूस्वामी प्रभावित होंगे।
2. भागलपुर-मुंगेर एयरपोर्ट (अजगैबीनाथ धाम)
भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में विकसित होने वाले एयरपोर्ट के लिए लगभग 3,145 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इसके लिए 14 गांवों के लगभग 12,000 भूस्वामियों की जमीन का उपयोग किया जाएगा।
सीधे खरीद पर जोर: नई भूमि नीति का होगा इस्तेमाल
सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए 'बिहार रैयती भूमि खरीद नीति, 2020' का पालन करने का निर्णय लिया है। इस नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सरकार प्राथमिकता के आधार पर भूस्वामियों से सीधे बातचीत कर जमीन की खरीद करेगी। भूमि अधिग्रहण अधिनियम का सहारा केवल उन्हीं मामलों में लिया जाएगा जहां सीधी बातचीत सफल नहीं हो पाती है या अन्य अनिवार्य परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं।
"सिविल एविएशन विभाग ने भूमि मापन, टाइटल वेरिफिकेशन और डिजिटल लैंड बैंक बनाने के लिए कंसल्टेंसी फर्मों का