बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर विवाद में धार्मिक न्यास पर्षद का बड़ा हस्तक्षेप, मूलचंद गोलछा बने अस्थायी न्यासधारी

Akhand India Desk26 August 20261 min read7 viewsDharm
बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर विवाद में धार्मिक न्यास पर्षद का बड़ा हस्तक्षेप, मूलचंद गोलछा बने अस्थायी न्यासधारी

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना ने अररिया के फारबिसगंज स्थित प्राचीन बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर के सुचारू प्रबंधन, संरक्षण और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पर्षद ने प्रसिद्ध समाजसेवी मूलचंद गोलछा को मंदिर का एक वर्ष के लिए अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया है। यह मंदिर एक निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी पुरानी समिति निष्क्रिय हो गई थी।

मंदिर के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी

फारबिसगंज के बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर के संचालन के लिए बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने मूलचंद गोलछा को यह जिम्मेदारी सौंपी है। वर्ष 2001 में बनी पुरानी न्यास समिति के अप्रभावी होने और नियमों का पालन न करने पर पर्षद ने उसे विघटित कर दिया था। दुर्गा पूजा महासंघ के अध्यक्ष मूलचंद गोलछा ने मंदिर की जर्जर स्थिति को सुधारने के लिए आवेदन दिया था जिस पर यह कार्रवाई हुई है।

धार्मिक न्यास पर्षद की शर्तें और निर्देश

बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 33 के तहत यह मान्यता एक साल के लिए दी गई है। नियमों के तहत मंदिर की भूमि को बेचा या गिरवी नहीं रखा जा सकता है। सभी आय-व्यय का हिसाब रखना होगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर हर तीन महीने में रिपोर्ट पर्षद को देनी होगी।

संपत्ति का विवरण और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

मंदिर की सभी संपत्तियां राजस्व दस्तावेजों में बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर के नाम से ही दर्ज रहेंगी। चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव राकेश रौशन समेत कई गणमान्य लोगों ने इस फैसले पर खुशी जताई है। लोगों का मानना है कि इस निर्णय से मंदिर के विकास और संरक्षण का नया रास्ता खुलेगा।

Share:

Comments

Leave a comment