बिहार में महाघोटाला: 10 लाख कर्मचारियों की सैलरी रुकी, ₹9 लाख महीना ले रहे थे क्लर्क!

बिहार में एक ऐसा वेतन घोटाला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। सरकार ने इस बड़े फर्जीवाड़े को रोकने के लिए राज्य के लगभग 10.3 लाख कर्मचारियों का वेतन अक्टूबर महीने के लिए फ्रीज कर दिया है। इस सूची में 9 लाख शिक्षक और 1.3 लाख पुलिसकर्मी शामिल हैं।
कैसे हुआ इस घोटाले का खुलासा?
Accountant General (AG) की ऑडिट रिपोर्ट और CAG की टिप्पणियों ने शिक्षा और गृह विभाग में भारी वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश किया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने पुष्टि की है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह जांच शुरू की गई है। वित्त सचिव विनय कुमार ने गृह और शिक्षा विभाग के सचिवों को पिछले पांच वर्षों के सभी वेतन बिलों की गहन जांच करने का कड़ा निर्देश दिया है।
₹52,000 की बेसिक सैलरी और ₹9 लाख का महीना!
जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे किसी को भी हैरान कर सकते हैं। HRMS और CFMS पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर कुछ कर्मचारी सिस्टम को ही लूट रहे थे।
- जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी मात्र ₹52,000 थी, वे हर महीने ₹6 लाख से ₹9 लाख तक निकाल रहे थे।
- पटना में एक क्लर्क तो महीने के ₹9.81 लाख तक वसूल रहा था।
घोटाले के कुछ सनसनीखेज मामले
जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं जो सिस्टम की पोल खोलते हैं:
1. पटना का मामला
पटना के गुलज़ारबाग स्थित FNS एकेडमी हाई स्कूल में क्लर्क विजय कृष्ण विद्यार्थी और अटेंडेंट संजू कुमारी को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में ₹76,71,983 की अनियमितता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मनीष कुमार और अमित कुमार के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
2. सुपौल में फर्जी शिक्षक आईडी का खेल
सुपौल में क्लर्क मोहम्मद हताशमुल पर आरोप है कि उसने 11 फर्जी शिक्षक आईडी बनाईं और ₹1.83 करोड़ की राशि अपनी मां और सास के खातों में ट्रांसफर कर दी।
3. भागलपुर में गिरफ्तारी
भागलपुर में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) शशि चंदन चौधरी और डेटा एंट्री ऑपरेटर अविनाश राज को गिरफ्तार किया गया है। उन पर 'तनुश्री' नामक एक काल्पनिक शिक्षक के नाम पर ₹98 लाख का घोटाला करने का आरोप है।
सरकार की सख्त कार्रवाई
इस घोटाले के बाद सरकार ने अब यह अनिवार्य कर दिया है कि वेतन संबंधी दस्तावेज़ तैयार करने, सत्यापित करने और उन्हें मंजूरी देने का काम केवल नियमित कर्मचारी ही करेंगे। सभी जिलाधिकारियों (DM) को सख्त जांच करने, धोखाधड़ी से प्राप्त धन की वसूली करने और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।