बिहार: मिड-डे मील का फंड नहीं, ऊपर से मरम्मत का आदेश; प्रधानाध्यापक परेशान!

जमुई के सोनो ब्लॉक में स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को मिड-डे मील के फंड और मरम्मत के खर्च को लेकर भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।

Ghazala Saheb28 October 20262 min read0 viewsBihar
बिहार: मिड-डे मील का फंड नहीं, ऊपर से मरम्मत का आदेश; प्रधानाध्यापक परेशान!

बिहार के जमुई जिले के सोनो ब्लॉक में सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। एक तरफ जहां शिक्षा विभाग ने त्योहारों के मद्देनजर स्कूलों की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का आदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर मिड-डे मील के लिए जरूरी फंड भी महीनों से नहीं मिला है। इस दोहरी मार से स्कूल प्रबंधन पूरी तरह से संकट में है।

मरम्मत का आदेश और खाली खजाना

जिला शिक्षा अधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने स्कूलों को दिवाली और छठ पूजा से पहले बुनियादी सुधार करने का निर्देश दिया है। विभाग का कहना है कि मानसून के कारण स्कूलों को नुकसान पहुंचा है और दीवारों पर लिखे नामांकन के आंकड़े भी धुंधले पड़ गए हैं। इस आदेश के तहत स्कूलों को निम्नलिखित कार्य पूरे करने होंगे:

  • स्कूल भवनों की मामूली मरम्मत।
  • पीने के पानी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना।
  • शौचालयों का रखरखाव।
  • स्कूल की दीवारों की पुताई।

विभाग ने इन कार्यों के लिए 'कंपोजिट स्कूल ग्रांट' का उपयोग करने को कहा है। लेकिन प्रधानाध्यापकों का कहना है कि 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए आवंटित 25,000 रुपये की राशि पहले ही चौक, डस्टर और इंटरनेट रिचार्ज जैसे दैनिक परिचालन खर्चों में खत्म हो चुकी है। ऐसे में मरम्मत के लिए कोई पैसा बचा ही नहीं है।

मिड-डे मील के लिए खुद की जेब ढीली कर रहे शिक्षक

संकट केवल मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के पोषण पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्कूलों में बच्चों को खाना खिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाला मिड-डे मील (MDM) कन्वर्जन फंड पिछले पांच महीनों से नहीं मिला है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई शिक्षकों को बच्चों के भोजन के लिए अपनी जेब से पैसे देने पड़ रहे हैं या कर्ज लेना पड़ रहा है।

स्थानीय दुकानदारों ने भी अब स्कूलों को उधार पर राशन देना बंद कर दिया है, जिससे बच्चों के भोजन की व्यवस्था करना और भी कठिन हो गया है।

प्रधानाध्यापकों की मांग

नाम न छापने की शर्त पर बात करते हुए प्रधानाध्यापकों ने विभाग की सख्त समय सीमा और वित्तीय स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बिना अतिरिक्त बजट के मरम्मत कार्य करना पूरी तरह से असंभव है। उन्होंने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. पिछले पांच महीनों के लंबित मिड-डे मील कन्वर्जन फंड को तुरंत जारी किया जाए।
  2. मरम्मत कार्यों के लिए एक अलग विशेष आकस्मिक निधि (Contingency Fund) आवंटित की जाए ताकि स्कूलों का रख-रखाव सुचारू रूप से हो सके।
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