नदियों को मिलेगा नया जीवन, गाद से बनेगी सड़कें: बिहार की बड़ी पहल
बिहार सरकार और केंद्र के बीच समझौता। अब नदियों की गाद से सड़कें बनेंगी और बाढ़ की समस्या कम होगी।

बिहार की नदियों की सूरत बदलने और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के लिए बधाई दी है। इस पहल को राज्य के भविष्य के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।
नदियों की बदहाली और बाढ़ का मुख्य कारण: गाद
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने पटना में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि नदियों में गाद (Silt) का जमा होना उनकी बदहाली और बिहार में आने वाली भीषण बाढ़ का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पिछले डेढ़ दशक से राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की मांग कर रही थी ताकि नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखा जा सके।
लंबे संघर्ष और प्रयासों का इतिहास
इस समस्या के समाधान के लिए बिहार ने वर्षों तक प्रयास किए हैं। उपमुख्यमंत्री ने इस मुद्दे के ऐतिहासिक सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया:
- वर्ष 2011-12 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की बैठक में इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया था।
- उस समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री को बक्सर से लेकर फरक्का तक की हवाई यात्रा कराकर गंगा में गाद जमा होने की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा दिलाया गया था।
- वर्ष 2014 में भी तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के समक्ष फरक्का बराज के निर्माण के बाद बिहार में जमा होने वाली गाद की अनियंत्रित गति का मुद्दा उठाया गया था।
'बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन नीति-2026'
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने ‘बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन नीति-2026’ तैयार की है। इस नीति में गाद के निस्तारण की प्रक्रिया और इसके व्यावहारिक उपायों को विस्तार से शामिल किया गया है। इसी नीति के आधार पर 3 नवंबर को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस नई पहल से क्या होगा बड़ा बदलाव?
इस समझौते के लागू होने से बिहार को विकास और सुरक्षा के मोर्चे पर कई बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है:
- नदियों का पुनर्जीवन: नदियों से गाद निकालने से उनकी गहराई बढ़ेगी, जिससे नदियों का पुनरुद्धार होगा।
- बाढ़ पर नियंत्रण: नदियों की जल धारण क्षमता बढ़ने से बाढ़ की भयावहता में कमी आएगी।
- सड़क निर्माण में उपयोग: नदियों से निकाली गई गाद का उपयोग सड़कों के निर्माण और अन्य विकास कार्यों में मिट्टी भरने के लिए किया जा सकेगा।
- मिट्टी के कटाव पर रोक: इस प्रक्रिया से किसानों की उपजाऊ मिट्टी के कटाव और उसकी बर्बादी पर भी रोक लगेगी।