नदियों की गाद से बनेंगे नेशनल हाईवे, बिहार के लिए वरदान है नई नीति
बिहार सरकार और केंद्र के बीच गाद प्रबंधन समझौता हुआ है। अब नदियों की गाद का उपयोग नेशनल हाईवे बनाने में किया जाएगा, जिससे बाढ़ और विकास दोनों में मदद मिलेगी।

बिहार में नदियों और जलस्रोतों के प्रबंधन को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। बिहार सरकार और केंद्र सरकार के बीच नदियों से वैज्ञानिक तरीके से गाद (silt) हटाने और उस गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) के निर्माण में करने को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।
जदयू प्रवक्ता शंभू नाथ सिन्हा ने इस समझौते का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे बिहारवासियों के लिए एक वरदान करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल राज्य के विकास को गति देगी, बल्कि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उस दूरदर्शी परिकल्पना को भी साकार करेगी, जिसमें नदियों में जमा गाद के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से बाढ़ और जलजमाव जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान खोजने की बात कही गई थी।
हाईवे निर्माण में होगा गाद का बड़े पैमाने पर उपयोग
इस समझौते के तहत, नदियों और अन्य जलस्रोतों से निकाली जाने वाली उपयुक्त गाद का उपयोग नेशनल हाईवे बनाने में किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए बहुत ही विस्तृत और महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है:
- निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए: वर्तमान में चल रही 16 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में लगभग 243 लाख घन मीटर गाद का उपयोग किया जाना है।
- प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए: भविष्य की 27 प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए 835 लाख घन मीटर गाद के उपयोग की योजना बनाई गई है।
गौरतलब है कि वर्तमान में बिहार में लगभग 1,561 किलोमीटर लंबी 39 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 1,982 किलोमीटर लंबी 11 अन्य परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन
गाद प्रबंधन की इस नीति से राज्य को कई स्तरों पर लाभ होने की उम्मीद है। शंभू नाथ सिन्हा के अनुसार, इस पहल से एक ओर जहाँ नदियों और जलस्रोतों की जलधारण एवं जलप्रवाह क्षमता में सुधार होगा, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- मिट्टी का संरक्षण: निर्माण के लिए गाद के उपयोग से कृषि योग्य उपजाऊ मिट्टी के अनावश्यक दोहन में कमी आएगी।
- लागत और समय की बचत: इससे राजमार्ग निर्माण की लागत कम होगी और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
- बाढ़ नियंत्रण: नदियों से गाद निकलने से जल निकासी बेहतर होगी, जिससे बाढ़ की समस्या में राहत मिल सकती है।
"यह समझौता बिहार के किसानों, आम नागरिकों और राज्य के समग्र विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम है।" — शंभू नाथ सिन्हा
गंगा जल संधि और बिहार के जल अधिकारों का मुद्दा
इस अवसर पर शंभू नाथ सिन्हा ने 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के भविष्य पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को इस संधि के भविष्य को लेकर बिहार की पेयजल, सिंचाई, कृषि और औद्योगिक आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जदयू इस विषय पर जन-जागरूकता के लिए लगातार काम कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में गंगा नदी से सटे बिहार के 12 जिलों में ‘‘नीतीश संवाद’’ के माध्यम से लोगों को बिहार के जल अधिकारों और राज्य की भावी जल आवश्यकताओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।