बिहार के स्कूलों में जींस-टीशर्ट पर रोक: BRS नेता ने किया स्वागत
बिहार के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षक जींस और टी-शर्ट नहीं पहन सकेंगे। BRS नेता सुंदर राज यादव ने शिक्षा विभाग के इस फैसले का समर्थन किया है।

बिहार के सरकारी स्कूलों में अनुशासन और गरिमा बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने अब स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए जींस और टी-शर्ट जैसे कैजुअल कपड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया है। तेलंगाना के बीआरएस (BRS) नेता सुंदर राज यादव ने इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है।
शिक्षकों का पहनावा छात्रों के लिए प्रेरणा
सुंदर राज यादव ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि स्कूल ज्ञान के मंदिर होते हैं और शिक्षक छात्रों के लिए रोल मॉडल की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षकों के पहनावे का छात्रों के व्यवहार और मानसिकता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
"शिक्षकों के कपड़ों की गरिमा छात्रों को प्रभावित करती है। भारतीय संस्कृति में माता-पिता के बाद शिक्षकों को ही बच्चों का अगला अभिभावक माना जाता है। टी-शर्ट और जींस के बजाय औपचारिक ड्रेस कोड का पालन करना बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।"
शिक्षा विभाग का सख्त निर्देश
बिहार शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान जींस और टी-शर्ट पहनने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मचारियों को औपचारिक ड्रेस कोड (Formal Dress Code) का पालन करना अनिवार्य होगा।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि इन नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। यदि कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है। विभाग का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में एक गरिमामय और अनुशासित माहौल सुनिश्चित करना है।
डीजे और अश्लील मनोरंजन पर भी लगा प्रतिबंध
नए नियमों के तहत केवल पहनावे ही नहीं, बल्कि स्कूल परिसर के वातावरण को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने निम्नलिखित गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है:
- स्कूल परिसर में डीजे (DJ) सिस्टम का उपयोग।
- डिस्को प्रदर्शन और अन्य शोर-शराबे वाले कार्यक्रम।
- किसी भी प्रकार के अश्लील या निम्न स्तर के मनोरंजन शो।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल शैक्षणिक कैलेंडर में निर्धारित विशेष अवसरों पर ही आयोजित किए जा सकेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल परिसर केवल सीखने और विकास के लिए एक अनुकूल वातावरण बना रहे।