हरिद्वार से 1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बिजनौर में प्रशासन अलर्ट, डीएम ने बढ़ाई निगरानी

Prakriti Singh20 August 20263 min read36 viewsUttar Pradesh
हरिद्वार से 1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बिजनौर में प्रशासन अलर्ट, डीएम ने बढ़ाई निगरानी

हरिद्वार से 1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बिजनौर में प्रशासन अलर्ट, जिलाधिकारी व एसडीएम ने निगरानी बढ़ाई

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और हरिद्वार बैराज से गंगा में 1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर में गंगा और खोह नदी का जलस्तर बढ़ गया है। गंगा का जलस्तर संवेदनशील दायरे तक पहुंचने पर गुरुवार को चांदपुर और बिजनौर तहसील क्षेत्र के लगभग 11 गांवों की कृषि भूमि में जलभराव की स्थिति बन गई है। प्रशासनिक स्तर पर त्वरित मोर्चा संभालते हुए जिलाधिकारी जसजीत कौर और उप जिलाधिकारी चांदपुर प्रशांत वर्मा ने प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया।

डीएम ने बाढ़ चौकियों को 24 घंटे सक्रिय रखने, प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने और स्वास्थ्य टीमों को घर-घर भेजकर जांच करने के कड़े निर्देश दिए हैं। आबादी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है और जनजीवन सामान्य बना हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खेतों से पानी उतरते ही कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम के जरिए सर्वे कराकर किसानों को फसल क्षति का उचित आर्थिक मुआवजा दिलाया जाएगा।

नगीना के बढ़ापुर में खोह नदी से कटान की आशंका

पहाड़ों पर भारी वर्षा के चलते बिजनौर में खोह नदी का जलस्तर बढ़ने से नगीना तहसील के बढ़ापुर क्षेत्र स्थित गांवों में कटान का खतरा पैदा हो गया था। डीएम जसजीत कौर ने सिंचाई, वन विभाग, तहसील और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ मौके का मुआयना किया। उन्होंने कटान रोकने के लिए तकनीकी प्रबंध करने और नदी किनारे बसी आबादी की सूची तैयार कर आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल बाढ़ आश्रय स्थलों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने बताया कि फिलहाल जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहने तक अधिकारियों को फील्ड में रहकर 24 घंटे सोशल मीडिया और जमीनी हालात पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

चांदपुर के संवेदनशील गांवों में आवागमन सुचारू, राहत चौकियां और नावें तैनात

चांदपुर तहसील के जलीलपुर ब्लॉक अंतर्गत दतियाना, रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी के संपर्क मार्गों पर एक से डेढ़ फीट पानी आ गया है, लेकिन गांवों का संपर्क टूटा नहीं है और ग्रामीण ट्रैक्टरों के जरिए आवागमन कर रहे हैं। एसडीएम प्रशांत वर्मा की निगरानी में एहतियातन 10 सीटर और 25 सीटर क्षमता की दो आधुनिक नावें तैनात कर दी गई हैं। प्राथमिक विद्यालयों में चार अत्याधुनिक बाढ़ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं, जहां लेखपालों और राजस्व कर्मियों की 24 घंटे रोस्टरवार तैनाती की गई है।

300 राशन किट वितरित और संयुक्त निगरानी

जनपद के प्रभावित 11 गांवों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अब तक लगभग 300 राशन किटों का वितरण कराया जा चुका है और अतिरिक्त राहत सामग्री का बफर स्टॉक तैयार है। सुरक्षा की दृष्टि से जिले में फ्लड पीएसी तैनात कर दी गई है, जबकि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ सीधा समन्वय स्थापित किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग की टीमें तहसील व ब्लॉक स्तर पर तैनात हैं, जो डोर-टू-डोर दवाओं का वितरण, कीटनाशक छिड़काव और पशुओं का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण कर रही हैं।

फसलों का संयुक्त सर्वे और मुआवजा

तटीय क्षेत्रों में गंगा का पानी खेतों में घुसने से गन्ने की फसलों को हुए आंशिक नुकसान पर प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई है। आपदा प्रबंधक प्रशांत सक्सेना ने बताया कि पानी कम होते ही राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम स्थलीय निरीक्षण करेगी। यदि फसलों में 33 प्रतिशत से अधिक की क्षति पाई जाती है, तो शासन की निर्धारित दैवीय आपदा नियमावली के तहत किसानों को समयबद्ध आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

जिले में 32 बाढ़ चौकियां व 35 आश्रय स्थल सक्रिय

जिला आपदा विशेषज्ञ प्रशांत सक्सेना के अनुसार, जनपद में बाढ़ से निपटने के लिए पुख्ता अग्रिम व्यवस्थाएं की गई हैं। जिले भर में कुल 32 बाढ़ चौकियां और 35 बाढ़ आश्रय स्थल स्थापित किए जा चुके हैं। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने बताया कि जनपद में 24 संवेदनशील तथा 5 अति संवेदनशील इलाके चिह्नित हैं। गंगा और खोह नदी दोनों पर गेज स्थापित कर जलस्तर की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। मौसम विभाग की चेतावनी मिलते ही हर 2 घंटे में सभी आइटम तहसीलदार, बीडीओ, ग्राम प्रधानों और आपदा मित्रों को फोन कर अलर्ट और वेदर अपडेट दिया जा रहा है।

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