कर्नाटक में 8.24 लाख करोड़ का कर्ज का जाल! बीजेपी का डीके शिवकुमार पर तीखा हमला

कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार और विपक्ष बीजेपी के बीच आर्थिक प्रबंधन को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में राज्य 8.24 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज के जाल में धकेला जा रहा है।
वित्त विभाग ने दिया 'रेड सिग्नल'
बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है। स्थिति इतनी गंभीर है कि वित्त विभाग ने खुद बिना बजट वाली नई घोषणाएं करने के खिलाफ 'रेड सिग्नल' जारी कर दिया है। बीजेपी का आरोप है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार केवल प्रचार और दिखावे के लिए मनमाने वित्तीय वादे कर रहे हैं, जबकि हकीकत में राज्य के पास एक पैसा भी नहीं बचा है।
बिना बजट के बड़ी घोषणाएं और दिखावा?
विपक्ष ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे केवल विज्ञापन और शोमैनशिप के जरिए जनता को गुमराह कर रहे हैं। बीजेपी ने मुख्यमंत्री द्वारा की गई हालिया घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए पूछा:
- ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी योजना: इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है।
- भारत जोड़ो युवा क्लब: इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये के अनुदान का वादा किया गया है।
बीजेपी ने सवाल किया कि क्या इन बड़ी योजनाओं के लिए कोई वास्तविक बजटीय आवंटन किया गया है या ये केवल चुनावी और प्रचार स्टंट हैं?
वित्तीय संकट के भयावह आंकड़े
बीजेपी ने राज्य की आर्थिक बदहाली को दर्शाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं:
- राज्य वर्तमान में 22,957 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना कर रहा है।
- ठेकेदारों के 36,000 करोड़ रुपये के भुगतान रोके गए हैं।
- लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं।
पार्टी का आरोप है कि नकदी की भारी कमी के कारण परिवहन निगमों, सिंचाई निगमों और बिजली कंपनियों के बकाया भुगतान करना भी लगभग असंभव हो गया है।
विपक्ष ने मांगा मुख्यमंत्री का इस्तीफा
बेंगलुरु में बीजेपी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार को आर्थिक दिवालियापन का दोषी ठहराया। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा:
"विकास के लिए कोई पैसा नहीं बचा है। हम पहले ही कर्ज ले चुके हैं। वित्त विभाग स्पष्ट रूप से कह रहा है कि यह डीके शिवकुमार की जिम्मेदारी है क्योंकि वे वित्त मंत्री भी हैं। आपने वित्त विभाग को संभालने में विफलता दिखाई है, इसलिए आपको इस्तीफा देना चाहिए।"
वहीं, विधान परिषद में विपक्ष के नेता छलवड़ी नारायणस्वामी ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के खजाने को पानी की तरह बहा रही है और अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के कल्याण के लिए रखे गए फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों के उत्थान के लिए निर्धारित धन को अन्य आयोजनों में खर्च किया जा रहा है, जो कि गलत है।