देश की प्रगति से बेचैन है विपक्ष: राहुल गांधी के UPI MDR वाले बयान पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन का पलटवार

पुणे में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने के फैसले की आलोचना की थी। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष की बेचैनी देश की प्रगति से जुड़ी हुई है।
- पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए नितिन नबीन ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया।
- उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास देश की प्रगति पर चर्चा करने का नजरिया नहीं है।
- राहुल गांधी ने सरकार के इस कदम को UPI टैक्स बताया था और इसे वापस लेने की मांग की थी।
नितिन नबीन के बयान की मुख्य बातें
नितिन नबीन ने कहा कि विपक्ष ब्रिक्स समिट और AI समिट में भी कमियां निकालता है। उन्होंने देश के विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट 7 लाख करोड़ रुपये है। वे आयुष्मान भारत योजना से लाभान्वित होने वाले लाखों-करोड़ों लोगों और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को स्वीकार करने में असफल रहते हैं।
राहुल गांधी का आरोप और MDR नियम
नितिन नबीन का यह बयान राहुल गांधी के उस बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने सरकार के उस फैसले की आलोचना की थी जिसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की बात कही गई है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी दबाव में काम कर रही है।
नया MDR फ्रेमवर्क और नियम
नए फ्रेमवर्क के तहत MDR केवल 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M UPI ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, जबकि पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। सरकार ने यह भी कहा है कि 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे दुकानदारों के लिए जीरो-MDR फ्रेमवर्क के दायरे में आने वाले ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। वित्त मंत्रालय के अनुसार, सभी P2M ट्रांजैक्शन का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा इससे प्रभावित नहीं होगा।
MDR को लेकर वित्त मंत्रालय और समिति की रिपोर्ट
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI द्वारा वसूला जाने वाला कोई चार्ज है, बल्कि इसे बैंक और पेमेंट एप्लीकेशन प्रोवाइडर सहित पेमेंट इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच बांटा जाता है। यह मुद्दा वित्त पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट के बाद चर्चा में आया है। समिति ने UPI इकोसिस्टम के लिए एक व्यावहारिक रेवेन्यू मैकेनिज्म की मांग की थी। समिति ने यह भी चिंता जताई थी कि 2,000 करोड़ रुपये के बजट आवंटन और इंडस्ट्री के अनुमानित 20,700 करोड़ रुपये के ऑपरेशनल कॉस्ट के बीच बहुत बड़ा अंतर है।
विदेशी दबाव के आरोपों का खंडन
केंद्र सरकार ने उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि MDR लागू करने का फैसला विदेशी दबाव में लिया गया था। सरकार का कहना है कि भारत की डिजिटल पेमेंट पॉलिसी स्वतंत्र रूप से तय की जाती है। नया MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है और सरकार का यह भी कहना है कि उपभोक्ताओं से UPI ट्रांजैक्शन के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।