भारतीय मुक्केबाजी में स्थिरता जरूरी, अजय सिंह का समर्थन: बोरिस वैन डेर वोरस्ट
पूर्व विश्व मुक्केबाजी अध्यक्ष बोरिस वैन डेर वोरस्ट ने अजय सिंह के नेतृत्व का समर्थन करते हुए भारतीय मुक्केबाजी में स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया।

विश्व मुक्केबाजी के पूर्व अध्यक्ष बोरिस वैन डेर वोरस्ट ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के भीतर चल रही कथित खींचतान के बीच अध्यक्ष अजय सिंह के नेतृत्व का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय मुक्केबाजी ने हाल के वर्षों में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्हें बरकरार रखने और आगे बढ़ाने के लिए खेल में भारतीय मुक्केबाजी में स्थिरता होना अत्यंत आवश्यक है।
खिलाड़ियों का हित सर्वोपरि
बीएफआई के भीतर अध्यक्ष और सचिव के बीच मतभेदों की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए वैन डेर वोरस्ट ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुक्केबाजों के हितों को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने अजय सिंह और बीएफआई के सीईओ अरुण मलिक की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी टीमों को भेजने और खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने में शानदार काम किया है।
उन्होंने आगे कहा, "राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के दौरान मिले ऐतिहासिक पदकों के बाद, अब यह जरूरी है कि इस तरह के नेतृत्व को जारी रखा जाए। मुक्केबाजों के लिए स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण है।"
निवेश और बढ़ता टैलेंट
अजय सिंह की प्रशासनिक क्षमताओं और उनके योगदान पर चर्चा करते हुए वैन डेर वोरस्ट ने बताया कि सिंह भारतीय मुक्केबाजी में काफी व्यक्तिगत निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है और यह न केवल एलीट मुक्केबाजी, बल्कि युवा स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि केवल अजय सिंह ही नहीं, बल्कि अन्य निवेशकों को भी भारतीय मुक्केबाजी की ओर रुख करना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब मैं एक व्यवसायी के रूप में भारत में खेलों में निवेश करने की सोचता हूँ, तो मुझे मुक्केबाजी में निवेश करना चाहिए क्योंकि यहाँ अपार संभावनाएं हैं।"
जमीनी स्तर का जुनून और ओलंपिक का लक्ष्य
वैन डेर वोरस्ट ने भारत के जमीनी स्तर (grassroots) के मुक्केबाजों के समर्पण की भी प्रशंसा की। उन्होंने याद किया कि जब वे पहली बार भारत आए थे, तो स्थानीय जिमों में खिलाड़ियों का अनुशासन देखकर दंग रह गए थे। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में दिन में दो बार प्रशिक्षण लेना और खिलाड़ियों की भूख और जुनून वाकई अद्वितीय है।
उन्होंने भविष्य के प्रति आशा जताते हुए कहा कि भारतीय मुक्केबाजी अब फलने-फूलने के लिए तैयार है और आगामी लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत एक बड़ी और ऐतिहासिक पदक तालिका हासिल करने की क्षमता रखता है।