BPSC चयनित पूर्व नियोजित शिक्षकों को मिले पुरानी सेवा का लाभ, सांसद जावेद ने मुख्यमंत्री से की मांग

Ghazala Saheb12 October 20262 min read0 viewsBihar
BPSC चयनित पूर्व नियोजित शिक्षकों को मिले पुरानी सेवा का लाभ, सांसद जावेद ने मुख्यमंत्री से की मांग

बिहार में BPSC के माध्यम से विद्यालय अध्यापक के पद पर चयनित उन शिक्षकों के लिए एक बड़ी हलचल शुरू हो गई है, जो पहले 'नियोजित शिक्षक' के रूप में कार्यरत थे। इन शिक्षकों की पुरानी सेवा की गणना, सेवा निरंतरता और वरीयता का लाभ देने की मांग अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई है। किशनगंज के सांसद डॉ. मो. जावेद आजाद ने इस गंभीर विषय पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर शिक्षकों के हित में सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेने का आग्रह किया है।

क्या है शिक्षकों की मुख्य मांग?

BPSC के माध्यम से नियुक्त होने वाले पूर्व नियोजित शिक्षकों का कहना है कि उन्हें उनकी पिछली सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। सांसद जावेद आजाद ने अपने पत्र के माध्यम से सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • सेवा निरंतरता: पूर्व नियोजित शिक्षकों की पुरानी सेवा को नई सेवा के साथ जोड़ा जाए।
  • वित्तीय उन्नयन और प्रोन्नति: उनकी पुरानी सेवा के आधार पर उन्हें वित्तीय लाभ और पदोन्नति दी जाए।
  • वरीयता का लाभ: लंबे समय तक शिक्षण कार्य करने के कारण उन्हें वरिष्ठता (Seniority) का लाभ मिले।

20 वर्षों का अनुभव, फिर भी नए शिक्षकों जैसा दर्जा?

सांसद ने अपने पत्र में शिक्षकों के संघर्ष और उनके योगदान का विस्तृत विवरण दिया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 से 2022 के बीच पंचायत और प्रखंड स्तर पर नियोजित शिक्षकों ने बहुत ही सीमित मानदेय और संसाधनों के बीच सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दी हैं।

"इनमें बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने लगभग 15 से 20 वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है।" सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि जब राज्य सरकार ने BPSC के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की, तो इन अनुभवी शिक्षकों ने भी TRE-1.0, TRE-2.0 और TRE-3.0 जैसी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की।

हालांकि, चयन के बाद उन्हें नए शिक्षकों के समान ही माना जा रहा है, जिससे उनके वर्षों के अनुभव और सेवाकाल का लाभ प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति ने हजारों अनुभवी शिक्षकों के बीच असंतोष और चिंता पैदा कर दी है।

सरकार से नीतिगत निर्णय की अपील

सांसद डॉ. मो. जावेद आजाद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूर्व सेवा की यथासंभव गणना की जाए ताकि इन शिक्षकों का मनोबल बढ़ सके और उन्हें न्याय मिल सके। उन्होंने शिक्षा विभाग को इस संबंध में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सांसद ने अपने पत्र की प्रतिलिपि शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को भी भेज दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन अनुभवी शिक्षकों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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