'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया दंग, ब्रह्मोस की ताकत देख सहमे दुश्मन!
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर सटीक हमले के बाद ब्रह्मोस मिसाइल की वैश्विक मांग बढ़ी। सीईओ जयतीर्थ जोशी ने इसकी मारक क्षमता पर जानकारी दी।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के एमडी और सीईओ डॉ. जयतीर्थ जोशी ने कहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के सफल इस्तेमाल के बाद पूरी दुनिया ब्रह्मोस की क्षमताओं को देखकर अचंभित है। उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध के जटिल और उच्च-तीव्रता वाले माहौल में इस मिसाइल प्रणाली ने अपनी अजेय शक्ति का प्रदर्शन किया है।
युद्ध के मैदान में ब्रह्मोस का लोहा
डॉ. जोशी के अनुसार, ब्रह्मोस अब केवल एक मिसाइल नहीं रह गई है, बल्कि यह एक आत्म-निर्भर और आत्मविश्वास से भरे नए भारत की शक्ति, सटीकता और गौरव का प्रतीक बन चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पहली बार इस हथियार प्रणाली को सक्रिय युद्ध में तैनात किया था।
इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस जैसे कि नूर खान भी शामिल थे। ब्रह्मोस ने अपनी स्टील्थ (छिपने की क्षमता), गति और चपलता बनाए रखते हुए दुश्मन के लक्ष्यों को बेहद सटीक तरीके से खत्म करने की अपनी क्षमता साबित की है।
"ब्रह्मोस ने यह साबित कर दिया है कि यह आज के जटिल, मल्टी-डोमेन और उच्च-तीव्रता वाले युद्ध के लिए एक अत्यंत विकसित और घातक प्रणाली है। भारत के बेजोड़ 'फर्स्ट स्ट्राइक' हथियार के रूप में, इसने अपनी सर्वोच्चता सिद्ध कर दी है।" - डॉ. जयतीर्थ जोशी
रक्षा निर्यात में भारत की ऊंची उड़ान
ब्रह्मोस की सफलता केवल युद्ध के मैदान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।
- बढ़ता निर्यात: भारत के रक्षा निर्यात में जबरदस्त उछाल आया है, जो 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें 62.7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
- वैश्विक मांग: फिलीपींस के साथ ऐतिहासिक निर्यात सौदे के बाद, अब दक्षिण-पूर्व एशिया के दो अन्य देशों के साथ भी समझौते किए जा चुके हैं।
- भविष्य के लक्ष्य: इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों को होने वाली डिलीवरी के साथ, भारत का रक्षा निर्यात 600 मिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने की राह पर है।
भविष्य की तकनीक: ब्रह्मोस-NG और लंबी दूरी की मिसाइल
ब्रह्मोस एयरोस्पेस अब भविष्य की चुनौतियों के लिए नई तकनीकों पर काम कर रहा है, जो भारत की हवाई हमले की क्षमता को और बढ़ा देंगी।
ब्रह्मोस-NG (Next Generation)
DRDO और रूस की NPO Mashinostroyeniya के सहयोग से विकसित होने वाली यह अगली पीढ़ी की मिसाइल आकार में छोटी, हल्की और अधिक स्टील्थ वाली होगी। डॉ. जोशी ने बताया कि इसका पहला प्रोटोटाइप 2027 या 2028 तक विकसित होने की उम्मीद है। इसमें अधिक स्वदेशी सामग्री और उन्नत सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा।
1,500 किमी की मारक क्षमता
कंपनी एक 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले वेरिएंट पर भी काम कर रही है। वर्तमान में यह परियोजना वैचारिक चरण में है, लेकिन मिसाइल ने पहले ही जमीन, समुद्र और हवा से किए गए परीक्षणों में अपनी लंबी दूरी की क्षमताओं का लोहा मनवाया है।