सीएम कार्यालय में CBI की रेड: कांग्रेस का हमला, कहा- 'इससे बुरा कुछ नहीं'

चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप कार्यालय में सीबीआई (CBI) द्वारा की गई छापेमारी ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य की स्थिति अब उस स्तर पर पहुंच गई है जहां केंद्रीय एजेंसियों को मुख्यमंत्री के कार्यालय में तलाशी लेनी पड़ रही है।
लोकपाल के वादे पर कांग्रेस का प्रहार
कांग्रेस के पंजाब अध्यक्ष परगट सिंह ने इस घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने लोकपाल का वादा करके जनता से वोट मांगे थे, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है।
"AAP लोकपाल का वादा करके सत्ता में आई थी, लेकिन आज स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री के कार्यालय में छापेमारी की जा रही है। इससे बुरा और कुछ नहीं हो सकता," परगट सिंह ने कहा।
गौरतलब है कि सीबीआई ने मुख्यमंत्री के विशेष अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुमान और पांच अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एजेंसी ने चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय सहित आठ अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है।
भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में हेरफेर के आरोप
सीबीआई की इस जांच के पीछे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। एजेंसी के मुताबिक, यह मामला सरकारी नियुक्तियों, विभागीय कार्यवाही, नीति निर्धारण, प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग और भूमि से जुड़े मामलों में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए हेरफेर करने से संबंधित है।
यह पूरी कार्रवाई पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद हुई है। दरअसल, एडवोकेट निखिल सराफ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर अदालत ने सीबीआई को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था। बताया जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उठाए गए सवालों पर पंजाब पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने के बाद हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
केजरीवाल और मान की जिम्मेदारी: प्रताप सिंह बजवा
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बजवा ने इस मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। बजवा ने कहा कि यदि सरकार ने खुद इन संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की होती, तो वे इस स्थिति से बच सकते थे।
बजवा ने भ्रष्टाचार के मामलों की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा:
- जमीन, ग्राम पंचायतों, तबादलों और ठेके देने से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप हैं।
- मुख्यमंत्री कार्यालय और मान के परिवार से जुड़े भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।
- जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।
विपक्ष का कहना है कि हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही यह जांच शुरू हो पाई है, क्योंकि राज्य प्रशासन इन मामलों पर चुप्पी साधे हुए था।