कुनो में चीते की मौत पर मचा हड़कंप: केंद्र ने भेजी हाई-लेवल जांच टीम
मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में 19 महीने के चीते की गोली लगने से मौत के बाद केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय जांच टीम भेजी है।

मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते (KNG22) की गोली लगने से हुई मौत ने वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए, केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय केंद्रीय टीम को जांच के लिए मध्य प्रदेश रवाना कर दिया है।
गोली लगने से हुई चीते की दर्दनाक मौत
यह दुखद घटना तब सामने आई जब 'चीता निर्वा' की संतान, 19 महीने के चीते को 25 अक्टूबर 2026 को मोरेना के क्षेत्रीय वनों में घायल अवस्था में पाया गया। यह इलाका कुनो नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र के बाहर स्थित है। मध्य प्रदेश वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इसे श्योपुर क्षेत्रीय वन मंडल से रेस्क्यू किया और जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा सुविधा में आपातकालीन सर्जरी के लिए भेजा गया।
सर्जरी के दौरान चीते के शरीर से पांच गोली के छर्रे (firearm pellets) बरामद किए गए। हालांकि डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए गहन चिकित्सा और आपातकालीन सर्जरी की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि 27 अक्टूबर 2026 को चीते ने दम तोड़ दिया। मेडिकल जांच में चीते के शरीर के भीतर गोली के छर्रों के कारण हुए गंभीर आंतरिक घावों की पुष्टि हुई है।
'प्रोजेक्ट चीता' की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
'प्रोजेक्ट चीता' के महत्व और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने इस मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। जांच के लिए भेजी गई उच्च स्तरीय टीम में निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं:
- वन महानिरीक्षक (Inspector General of Forests)
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अधिकारी
- वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक
- WCCB के क्षेत्रीय उप निदेशक
यह टीम मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि यह घटना किन परिस्थितियों में हुई। इसके अलावा, टीम सुरक्षा प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन, निगरानी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा करेगी।
राज्य सरकार ने भी बनाई स्पेशल टास्क फोर्स
राज्य सरकार ने भी इस मामले की जांच के लिए एक विशेष कार्य बल (STF) का गठन किया है, जिसमें वन और पुलिस अधिकारी शामिल हैं। केंद्रीय टीम और राज्य की मशीनरी मिलकर काम करेंगी। केंद्रीय टीम अपनी जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें मंत्रालय को सौंपेगी, जिसके आधार पर राज्य सरकार और क्षेत्रीय अधिकारियों को आगे के निर्देश दिए जाएंगे।