वोट-चोरी और लोकतंत्र बचाने की जंग: डॉ. चक्रपाणि हिमांशु का बड़ा हमला

Ghazala Saheb10 October 20263 min read0 viewsBihar
वोट-चोरी और लोकतंत्र बचाने की जंग: डॉ. चक्रपाणि हिमांशु का बड़ा हमला

बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर इंडिया गठबंधन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश इस समय एक बेहद गंभीर दौर से गुजर रहा है, जो किसी आपातकाल से कम नहीं है। डॉ. हिमांशु के अनुसार, जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन असल में वोट-चोरी को रोकने और देश के लोकतंत्र को बचाने की एक महत्वपूर्ण लड़ाई है।

चुनाव आयोग और सरकार पर गंभीर आरोप

डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान चुनाव तंत्र में पारदर्शिता की कमी है और मुख्य चुनाव आयुक्त वोट चोरी कर सरकार बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण से नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे नेता उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।

आंदोलन को दबाने के लिए सरकार द्वारा अपनाए जा रहे तरीकों की निंदा करते हुए उन्होंने निम्नलिखित आरोप लगाए:

  • आंदोलनकारियों को रोकने के लिए लगभग 250 ट्रेनों के परिचालन को प्रभावित किया गया।
  • 45 मेट्रो स्टेशनों और इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया।
  • धारा 163 लागू कर लगभग 2,000 लोगों को जबरन गिरफ्तार किया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट के वकीलों तक को गिरफ्तार किया गया।
"आज जंतर-मंतर पर जो आंदोलन हो रहा है, वह असल में वोट-चोरी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है।" — डॉ. चक्रपाणि हिमांशु

नेताओं की गिरफ्तारी और तानाशाही का माहौल

डॉ. हिमांशु ने लोकतंत्र के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी दिल्ली की सड़कों पर घसीटकर गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि देश में विपक्ष के 302 सांसदों की आवाज तक नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने के लिए करीब 30 हजार पुलिस बल की तैनाती की गई है, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।

प्रधानमंत्री और आर्थिक नीतियों पर प्रहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना साधते हुए डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने उन्हें देश का सबसे अयोग्य प्रधानमंत्री करार दिया। उन्होंने सरकार की पिछली नीतियों की आलोचना करते हुए कहा:

  1. कोरोना काल: उन्होंने कोरोना के दौरान थाली-ताली पिटवाने और टॉर्च जलवाने जैसे फैसलों की आलोचना की।
  2. नोटबंदी: नोटबंदी जैसे फैसले को देश पर थोपा गया।
  3. निजीकरण: शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का निजीकरण कर दिया गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है।

उन्होंने आगे कहा कि देश में महंगाई और भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और सरकार की रक्षा एवं सामाजिक नीतियां पूरी तरह विफल साबित हुई हैं।

जनता से एकजुट होने की अपील

अंत में, डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने देश के युवाओं, छात्रों और आम जनता से आह्वान किया कि वे इस तानाशाही के खिलाफ एकजुट हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और चुनाव तंत्र की रक्षा के लिए अब सड़कों पर उतरना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सभी से इस तानाशाही का विरोध करने और देश के भविष्य को बचाने के लिए एकजुट होने की अपील की।

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