जनगणना में मातृभाषा मैथिली को शामिल करने के लिए सहरसा में हुई चेतना समिति की बैठक

सहरसा में आगामी जनगणना के दौरान मातृभाषा के रूप में मैथिली को अधिक से अधिक संख्या में शामिल करने के लिए चेतना समिति की एक प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक देव रिसोर्ट गंगाजला सहरसा के सभागार में प्रो कुलानन्द झा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में कई प्रमुख नेता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिन्होंने मैथिली भाषा के समर्थन में अपने विचार रखे।
विधायक डॉ गौतम कृष्ण का बयान
महिषी के विधायक डॉ गौतम कृष्ण ने कहा कि मैथिली मिथिला में रहने वाले सभी जाति और धर्म के लोगों की एकमात्र भाषा है। उन्होंने कहा कि यह हम सबका पुनीत कर्तव्य है कि आगामी जनगणना में मैथिली को अपनी मातृभाषा के रूप में अंकित कराएं।
पूर्व मंत्री आलोक रंजन झा की बातें
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री आलोक रंजन झा ने कहा कि मां, मातृभूमि और मातृभाषा का सम्मान करना किसी भी सभ्य समाज के लिए नितांत आवश्यक है। उन्होंने इस हेतु आयोजित किए जाने वाले किसी भी कार्यक्रम में सहभागिता देने के लिए सदैव तत्पर रहने की बात कही और चेतना समिति के प्रयास की सराहना की।
प्रो कुलानन्द झा का संबोधन
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो कुलानन्द झा ने कहा कि सहरसा मिथिला के साहित्य चिंतकों की उर्वरा भूमि रही है और मैथिली भाषा के विकास के लिए यहाँ के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आगामी जनगणना में सहरसा जिला मैथिली भाषा भाषियों की संख्या के मामले में शत प्रतिशत होगा। उन्होंने कम संख्या वाले क्षेत्रों में अभियान चलाकर जागरूकता पर बल दिया और इसे प्रखंड एवं पंचायत स्तर तक पहुँचाने में मदद का आश्वासन दिया।
अन्य वक्ताओं के विचार
राजद के प्रदेश महासचिव धनिक लाल मुखिया ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया जाता है कि मैथिली किसी खास जाति की भाषा है जबकि मिथिला में रहने वाले लोगों की भाषा सिर्फ मैथिली ही है। नगर निगम की महापौर बैन प्रिया ने दैनिक उपयोग में भी मैथिली को प्रमुख स्थान देने और जनगणना में इसे अवश्य दर्ज कराने का आग्रह किया। चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानन्द ने कहा कि सहरसा हमेशा से मिथिला का प्रमुख केंद्र रही है और यहाँ बोली जाने वाली भाषा ही असली मैथिली है।