छपरा नगर निगम हड़ताल की चेतावनी: 30 को घेराव, 3 से काम ठप
सारण के छपरा में नगर निगम कर्मचारियों ने 30 अक्टूबर को घेराव और 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। जानें क्या हैं उनकी मांगें।

सारण जिले में छपरा नगर निगम हड़ताल की आहट से हड़कंप मच गया है। स्थानीय निकाय और सफाई कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों के इस कड़े रुख से अब शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के चरमराने का खतरा पैदा हो गया है।
30 अक्टूबर को घेराव और 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल
बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन एवं बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के संयुक्त मोर्चे ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 29 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो 30 अक्टूबर को सभी नगर निगम, परिषद और पंचायत मुख्यालयों का घेराव किया जाएगा।
आंदोलन को और उग्र रूप देते हुए कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि इसके बाद 3 नवंबर से वे पुनः अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। यदि यह हड़ताल होती है, तो शहरों में सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि पूर्व में हुई बैठकों में लिए गए निर्णयों का पूर्ण पालन नहीं किया जा रहा है। उनकी मांगों की सूची में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
- दैनिक और आउटसोर्सिंग कर्मियों का समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना।
- पीएफ (PF) और ईएसआई (ESI) अंशदान को नियमित रूप से जमा कराना।
- एनपीएस (NPS) अंशदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करना।
- अनुकंपा नियुक्तियों के लंबित मामलों का जल्द निष्पादन।
- पिछली हड़ताल के दौरान काटा गया वेतन वापस दिलाना।
प्रशासनिक चुप्पी से बढ़ता आक्रोश
इस आंदोलन की तपिश छपरा नगर निगम में भी काफी तेज हो गई है। छपरा इकाई के संघ अध्यक्ष सियाराम सिंह ने महापौर को एक ज्ञापन सौंपकर सफाई कर्मियों की 12 सूत्रीय लंबित मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है।
इस पूरे मामले पर छपरा के महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने बताया कि उन्हें कर्मचारी संघ का आवेदन प्राप्त हो चुका है। हालांकि, कर्मचारियों में इस बात को लेकर भारी रोष व्याप्त है कि नगर आयुक्त रणजीत कुमार से बार-बार संपर्क करने के बावजूद उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है। प्रशासन की इस चुप्पी ने कर्मचारियों के गुस्से को और अधिक भड़का दिया है।