छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्रांति! 5.60 लाख करोड़ के निवेश का रोडमैप
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिल्ली में ऊर्जा क्षेत्र में 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश का बड़ा रोडमैप पेश किया है।

नई दिल्ली में आयोजित 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो' में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के भविष्य के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। उन्होंने निवेशकों और उद्योग जगत के दिग्गजों को छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र में भागीदार बनने का न्योता देते हुए बताया कि अगले पांच वर्षों में राज्य में छत्तीसगढ़ ऊर्जा निवेश के माध्यम से 5.60 लाख करोड़ रुपये के अवसर उपलब्ध हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत मंडपम में उद्घाटित इस चार दिवसीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने राज्य के ऊर्जा रोडमैप को विस्तार से समझाया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और श्रीपद येशो नायक भी उपस्थित रहे।
नवीकरणीय और थर्मल ऊर्जा का मेगा प्लान
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। उनके द्वारा प्रस्तुत निवेश योजनाओं का मुख्य विवरण इस प्रकार है:
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): 23,923 मेगावाट की प्रस्तावित क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 1.33 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
- थर्मल पावर (Thermal Power): थर्मल पावर उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है।
राज्य का लक्ष्य अपनी हरित ऊर्जा (Green Energy) क्षमता को वर्तमान 3,000 मेगावाट से बढ़ाकर 2030 तक 15,000 मेगावाट करना है। इससे बिजली की कुल मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी।
जल और सौर ऊर्जा में बड़े बदलाव की तैयारी
ऊर्जा आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ ने पम्प्ड-स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर भी जोर दिया है। राज्य में 12,300 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 10 ऐसे प्रोजेक्ट्स की पहचान की गई है, जिनमें लगभग 65,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है:
- खेरा गांव का मॉडल: राजनांदगांव जिले का खेरा गांव छत्तीसगढ़ का पहला पूरी तरह से सौर ऊर्जा संचालित गांव बन गया है।
- पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: इस योजना के तहत राज्य में लगभग 1.26 लाख सौर ऊर्जा इकाइयां पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।
- पीएम कुसुम योजना: इसके तहत 395 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना है।
बायोगैस और परमाणु ऊर्जा: भविष्य की राह
मुख्यमंत्री ने कृषि अपशिष्ट, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग करके कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-इथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। राज्य में 80 मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्य ने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए भी योजना बनाई है। लगभग 4,200 मेगावाट की क्षमता वाले परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है।
"छत्तीसगढ़ सरकार औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है।" - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
इस प्रकार, छत्तीसगढ़ न केवल भारत के 2030 तक गैर-पारंपरिक स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा, बल्कि निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध गंतव्य भी साबित होगा।