छत्तीसगढ़ के सुकमा में आकार संस्था दिव्यांग बच्चों को बना रही है आत्मनिर्भर और दे रही है नई उड़ान

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में प्रशासन ने दिव्यांग बच्चों के सपनों को उड़ान देने के लिए 'आकार' नाम की संस्था की स्थापना की है। यह संस्था विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल शिक्षित करना नहीं बल्कि उन्हें सशक्त बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। छत्तीसगढ़ सरकार की इस सोच के तहत कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ जरूरी थेरेपी और प्रशिक्षण भी मिले, इस संस्था को जिला खनिज संस्थान न्यास यानी डीएमएफ (DMF) के जरिए तैयार किया गया है।
आकार संस्था में मिलने वाली सुविधाएं
'आकार' संस्था में स्पीच थेरेपी, फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, व्यवहार प्रबंधन और विशेष निर्देश जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। संस्था के अधीक्षक हरि कुमार कौशिक ने बताया कि सुकमा के नियमित स्कूलों से चुने गए 120 बच्चे फिलहाल यहां प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहां प्रशिक्षण पाने वाले कई बच्चे उच्च शिक्षा तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने आगे बताया कि लगभग 12 बच्चे रायपुर, भिलाई, दुर्ग और पुणे में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि कुछ डीएड और बीएड जैसे कोर्स कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ युवाओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। श्रवण बाधित एक पूर्व छात्र अब डाक विभाग में काम कर रहा है, जबकि दो छात्र इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में डिप्लोमा कोर्स कर रहे हैं।
बच्चों की सफलता और शिक्षकों के अनुभव
कौशिक ने कहा कि सुकमा जैसे चुनौतीपूर्ण जिले में ऐसी पहल सिर्फ एक संस्था की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच की कहानी है जो मानती है कि विकास तभी पूरा होता है जब समाज का हर बच्चा आगे बढ़े। विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार की यह एक संवेदनशील पहल है। 'आकार' जैसी संस्थाएं जमीनी स्तर पर समावेशी शिक्षा और मुख्यधारा में एकीकरण के विजन को साकार कर रही हैं। श्रवण बाधित बच्चों को सांकेतिक भाषा सिखाने वाले शिक्षक केवल देशमुख ने बताया कि शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन बच्चों की सीखने की क्षमता और लगातार कोशिशों ने इस रास्ते को आसान बना दिया। आकार में नेत्रहीन बच्चे ब्रेल लिपि के जरिए अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं।
आकार में सांकेतिक भाषा के साथ डांस सीखने वाली और आत्मानंद स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा पिंकी ने सांकेतिक भाषा के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त की। बोल पाने में असमर्थ पिंकी सोढ़ी ने बताया कि उसे आकार में पढ़ना बहुत पसंद है और यहां के शिक्षक बहुत अच्छे हैं। वह सांकेतिक भाषा सीख रही है और नृत्य में भी हिस्सा लेती है।