सुपौल: बाल विवाह रोकने के लिए चला 'सुरक्षित बचपन अभियान'

सुपौल में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत बाल विवाह रोकने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कानून और समाज की भूमिका पर जोर दिया गया।

Ghazala Saheb31 October 20262 min read0 viewsBihar
सुपौल: बाल विवाह रोकने के लिए चला 'सुरक्षित बचपन अभियान'

सुपौल जिले में 'सुरक्षित बचपन अभियान' के छठे दिन बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के नेतृत्व में जिले के विभिन्न स्कूलों और निर्मली अनुमंडलीय न्यायालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और बाल विवाह को जड़ से मिटाना है।

बाल विवाह: शिक्षा और स्वास्थ्य पर बड़ा प्रहार

निर्मली अनुमंडलीय न्यायालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार बच्चन ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों, उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली एक गंभीर सामाजिक समस्या है। उन्होंने जोर देकर कहा कि "केवल कानून का प्रभावी क्रियान्वयन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।"

ASHA SOP 2025 और संस्थागत समन्वय

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने ASHA SOP, 2025 के माध्यम से बाल विवाह की रोकथाम और विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय को प्रभावी बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्कूल, पंचायत, प्रशासन, पुलिस, अधिवक्ता और स्वयंसेवक बाल विवाह रोकने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसी भी संभावित बाल विवाह की जानकारी समय रहते सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाना अनिवार्य है।

प्रशासन और पुलिस की सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम के दौरान एडीसीपी दिवेश कुमार शर्मा ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के जरिए बाल विवाह की पहचान करने, रोकथाम करने और संबंधित अधिकारियों को समय पर सूचना देने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर तालमेल से ही इस समस्या पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

इस अवसर पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) श्याम नाथ साह, मुंसिफ भावेश कुमार, निर्मली के डीएसपी और एसडीओ सहित कई अधिवक्ता और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी ने मिलकर बच्चों के सुरक्षित भविष्य और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर बल दिया।

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