चिराग पासवान: चावल उत्पादन के साथ अब 'वैल्यू एडिशन' पर दें ध्यान
चिराग पासवान ने कहा कि भारत को चावल के उत्पादन के साथ-साथ वैल्यू एडिशन और तकनीक पर ध्यान देना चाहिए ताकि वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत हो सके।

नई दिल्ली में आयोजित 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026' के दौरान केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने चिराग पासवान चावल उत्पादन के भविष्य को लेकर एक बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल भारी मात्रा में चावल उगाने तक सीमित नहीं रह सकता; अब समय आ गया है कि हम उत्पाद की गुणवत्ता, रिसर्च और वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) पर अधिक ध्यान केंद्रित करें ताकि वैश्विक बाजारों में अपनी धाक जमा सकें।
वैश्विक बाजार में मजबूती के लिए जरूरी बदलाव
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया के चावल व्यापार में लगभग 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि केवल उत्पादन की मात्रा ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा, "चूंकि हमारे पास उत्पादन की मात्रा पहले से ही है, इसलिए अब हमें 'वैल्यू' और 'प्रोडक्ट' पर ध्यान देने की आवश्यकता है।"
Paswan ने सुझाव दिया कि भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में सुधार करने की तत्काल आवश्यकता है:
- ट्रेसिबिलिटी (Traceability): उत्पाद की उत्पत्ति और उसकी यात्रा को ट्रैक करने की क्षमता।
- सस्टेनेबिलिटी (Sustainability): पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ उत्पादन पद्धतियां।
- प्रोसेसिंग (Processing): कच्चे माल से उच्च मूल्य वाले उत्पाद तैयार करना।
स्वदेशी तकनीक और मशीनरी पर जोर
भारतीय कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने तकनीक के घरेलू निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धान की खेती से लेकर अंतिम प्रोसेसिंग तक की पूरी श्रृंखला में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी का निर्माण भारत में ही होना चाहिए। इससे न केवल आयात पर हमारी निर्भरता कम होगी, बल्कि यह सरकार के घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing) के लक्ष्य को भी पूरा करेगा।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) को देश के भविष्य से जोड़ते हुए मंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के सपने में यह क्षेत्र रीढ़ की हड्डी साबित होगा। उन्होंने कहा कि अतीत में हमारा मुख्य लक्ष्य खाद्य उत्पादन बढ़ाना था क्योंकि देश में कमी थी, लेकिन अब अगला चरण मूल्य सृजन (Value Creation) का होना चाहिए।
"मेरा वास्तव में मानना है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर हमें पिछले वर्षों में और अधिक जोर देना चाहिए था।" — चिराग पासवान
ग्लोबल फूड बास्केट बनेगा भारत
सरकार का विजन भारत को एक 'ग्लोबल फूड बास्केट' के रूप में स्थापित करना है। इसका अर्थ है कि भारत न केवल अपनी विशाल आबादी की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि दुनिया भर के देशों को भी उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराएगा। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते भारतीय व्यवसायों के लिए नई राहें खोलेंगे, जिससे उन्हें वैश्विक तकनीक और सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच मिलेगी।
तीन दिवसीय BIRC 2026 में किसान, निर्यातक, उद्योग प्रतिनिधि और शोधकर्ता शामिल हुए हैं, जिसका उद्देश्य चावल क्षेत्र की चुनौतियों को समझना और विकास के नए रास्ते तलाशना है।