CJI ने राहुल गांधी और खड़गे की मुलाकात की मांग ठुकराई, दिया बड़ा कारण

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा मांगी गई मुलाकात की मांग को खारिज कर दिया है। दोनों विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए CJI से मिलने और एक ज्ञापन सौंपने का अनुरोध किया था।
शक्तियों के पृथक्करण का दिया हवाला
CJI सूर्यकांत ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसी बैठक आयोजित करना संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। उन्होंने 'शक्तियों के पृथक्करण' (Separation of Powers) के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन मुद्दों को विपक्ष ने उठाया है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन (sub judice) हैं।
CJI ने अपने पत्र में कहा:
"लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का पूर्णतः उल्लंघन होगा, जो भारत के संविधान के मूल ढांचे का एक अभिन्न अंग है। यह स्थापित नैतिकता और न्यायिक मर्यादा के भी प्रतिकूल होगा।"
विपक्ष ने किन मुद्दों पर मांगी थी मुलाकात?
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो ज्ञापन देने की कोशिश की थी, उसमें मुख्य रूप से चार प्रमुख मुद्दों पर चिंता जताई गई थी:
- Election Commission: मुख्य चुनाव आयुक्त और भारतीय चुनाव आयोग से जुड़े मामले।
- छात्रों की गिरफ्तारी: छात्रों की कथित मनमानी और अनुचित गिरफ्तारियां।
- मेट्रो सेवाएं: मेट्रो स्टेशनों का बंद होना।
- ट्रेन सेवाएं: ट्रेनों का रद्द किया जाना।
न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास इन मुद्दों को प्रशासनिक रूप से हल करने की शक्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने याद दिलाया कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत, सुप्रीम कोर्ट के पास न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति है और वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बाध्य है।
CJI ने सुझाव दिया कि विपक्षी नेताओं के लिए प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक शक्ति का उपयोग करना अधिक उचित होगा। उन्होंने कहा कि नागरिक कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किसी भी समय अपने अधिकारों के प्रवर्तन के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इन मुद्दों से संबंधित मामले मंगलवार, 13 अक्टूबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने सलाह दी कि यदि वे चाहें, तो सोमवार को भौतिक रूप से या ई-फाइलिंग के माध्यम से अपनी याचिका दायर कर सकते हैं, जिसे कानून के अनुसार जल्द से जल्द सुना जाएगा।