अधिकार या विशेषाधिकार? CJI सूर्यकांत मानवाधिकारों पर बोले

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक बहुत ही गहरी और महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि CJI सूर्यकांत मानवाधिकारों के संदर्भ में समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति पर चिंता जताते हुए बोले कि यदि कोई अधिकार केवल शक्तिशाली लोगों के लिए काम करता है और समाज के सबसे निचले स्तर पर मौजूद लोगों तक नहीं पहुँच पाता, तो वह वास्तव में अधिकार नहीं बल्कि एक 'विशेषाधिकार' है।
शक्तिशाली के लिए अधिकार, गरीबों के लिए सिर्फ ब्रांडिंग?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में जस्टिस सूर्यकांत ने मानवाधिकारों की वास्तविक परिभाषा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संस्थानों की सफलता इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि उन्होंने कितने मामले सुलझाए, बल्कि इस बात से मापी जानी चाहिए कि क्या वे उन लोगों की आवाज बन पाए जो अपनी बात रखने में असमर्थ हैं।
उन्होंने समाज के उन वर्गों का उदाहरण दिया जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है:
- वे विचाराधीन कैदी जिन्होंने कभी अपने कानूनी वकील से मुलाकात नहीं की।
- बिना किसी दस्तावेज के काम करने वाले प्रवासी मजदूर।
- परिवारों द्वारा लावारिस छोड़ दिए गए बुजुर्ग।
- दिव्यांग व्यक्ति जिन्हें बुनियादी सेवाओं तक पहुँचने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
जस्टिस सूर्यकांत ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, "एक अधिकार जो शक्तिशाली लोगों के लिए काम करता है लेकिन शक्तिहीन लोगों के लिए विफल हो जाता है, वह सच्चे अर्थों में अधिकार नहीं है। यह केवल बेहतर ब्रांडिंग वाला एक विशेषाधिकार है।"
नल कनेक्शन का मतलब स्वच्छ पानी नहीं
पानी की उपलब्धता और उसके अधिकार पर चर्चा करते हुए CJI ने एक बहुत ही गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि केवल घर में नल का कनेक्शन दे देने से यह नहीं माना जा सकता कि लोगों को पानी का अधिकार मिल गया है। उन्होंने साफ किया कि पानी का सुरक्षित, विश्वसनीय और जरूरत के समय उपलब्ध होना अनिवार्य है।
"एक सूखा नल उस वादे को पूरा नहीं कर सकता जो वह पाइप दर्शाता है। और आर्सेनिक, फ्लोराइड या अन्य हानिकारक पदार्थों से दूषित पानी कोई सेवा नहीं है; यह जीवन और स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।"
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि 'जीवन के अधिकार' का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि गरिमा के साथ जीना है। इसमें स्वास्थ्य, भोजन, आश्रय, आजीविका और एक स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार भी शामिल है।