आयुर्वेद दिवस पर CM धामी ने की भगवान धन्वंतरि की पूजा, नंदा-सुनंदा महोत्सव में भी बिखेरी संस्कृति की छटा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस प्रार्थना सभा में उन्होंने प्रदेश की जनता के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और खुशहाली के लिए मंगल कामना की।
आयुर्वेद: भारत की प्राचीन विरासत और वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अटूट हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने और बीमारियों से बचाव करने में आयुर्वेद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद और भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान और सम्मान मिल रहा है।"
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरिद्वार के पतंजलि वेलनेस योगग्राम में पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुल के उद्घाटन समारोह में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
नंदा-सुनंदा महोत्सव: आस्था और परंपराओं का उत्सव
मुख्यमंत्री धामी की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। इससे पूर्व, उन्होंने नैनीताल में आयोजित नंदा-सुनंदा महोत्सव में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने देवी नंदा-सुनंदा के चरणों में शीश नवाकर राज्य की शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
महोत्सव में मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नंदा देवी महोत्सव केवल एक मेला नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की उन गौरवशाली परंपराओं का उत्सव है जो पीढ़ियों से हमारे समाज का हिस्सा रही हैं। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी जड़ों और संस्कृति पर गर्व करता है, वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
इस महोत्सव की कुछ प्रमुख विशेषताएं जो संस्कृति को जीवंत बनाती हैं:
- लोक कला: झोरा-चांचरी और अन्य पारंपरिक कला रूपों का प्रदर्शन।
- संगीत: ढोल-दमाऊ की थाप पर आधारित लोक संगीत।
- परंपरा: देवी नंदा-सुनंदा के स्वागत की प्राचीन रीति-रिवाजों का पालन।
आध्यात्मिकता की भूमि है उत्तराखंड
नैनीताल की सुंदरता का वर्णन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र केवल अपनी झीलों, पहाड़ों और हरी-भरी घाटियों के कारण पर्यटन के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह गहरी आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र भी है।
उन्होंने उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहाँ के कई स्थान भक्तों की आस्था के केंद्र हैं, जिनमें शामिल हैं:
- नैना देवी मंदिर
- हनुमानगढ़ी
- कैंची धाम
- मुक्तेश्वर (जहाँ श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेने आते हैं)