बाढ़ से मुक्ति के लिए बनेगा मास्टर प्लान: नदियों के किनारे बनेंगी फोरलेन सड़कें, CM ने दिए बड़े निर्देश

Ghazala Saheb24 September 20262 min read3 viewsBihar
बाढ़ से मुक्ति के लिए बनेगा मास्टर प्लान: नदियों के किनारे बनेंगी फोरलेन सड़कें, CM ने दिए बड़े निर्देश

पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में बिहार के बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब बाढ़ प्रबंधन के लिए केवल तात्कालिक राहत के बजाय एक स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने गंगा, गंडक और कोसी जैसी प्रमुख नदियों के व्यवस्थित प्रबंधन और उनके किनारे विकास की नई रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

नदियों का कायाकल्प और बाढ़ से सुरक्षा का नया मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के किनारे केवल तटबंध बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें और अधिक मजबूत करते हुए उनके ऊपर फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जाना चाहिए। इससे न केवल बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को समृद्ध बनाने में भी मदद मिलेगी।

बैठक में नदियों के प्रबंधन के लिए कुछ विशेष तकनीकी पहलुओं पर जोर दिया गया:

  • कोसी का विशेष प्रबंधन: कोसी नदी के शुरुआती 100 किलोमीटर के क्षेत्र को 'विशेष डेंजर जोन' माना गया है, जहाँ सुरक्षा के लिए डबल शीट पायलिंग करने की आवश्यकता है।
  • नदियों की सफाई: नदियों से गाद (सिल्ट) निकालने पर जोर दिया गया है ताकि जल प्रवाह और संग्रहण क्षमता को बेहतर बनाया जा सके।
  • दीर्घकालिक रणनीति: कोसी को एक गतिशील नदी प्रणाली मानते हुए, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि केवल सालाना बाढ़ राहत के बजाय दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण की रणनीति अपनाई जाए।

कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार: एक्सप्रेस-वे पर फोकस

राज्य में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की प्रगति की समीक्षा की गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

  1. इस एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 348.196 किलोमीटर है।
  2. इसका बड़ा हिस्सा यानी 336.205 किलोमीटर बिहार में होगा, जबकि लगभग 12 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में आएगा।

इसके अलावा, गंगा-अंबिका पथ (बिदुपुर दिघवारा), नारायणी पथ (दरिहारा-डुमरिया घाट) और विश्वामित्र पथ (बक्सर आरा-मनेर) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

ऊर्जा क्षेत्र और सौर ऊर्जा पर जोर

बिजली उत्पादन और कृषि क्षेत्र को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा भी की। उन्होंने पीरपैंती तापीय विद्युत परियोजना (3x800 मेगावाट) और बांका तापीय विद्युत संयंत्र के कार्यों में तेजी लाने को कहा।

"कृषि क्षेत्र को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है। राजकीय नलकूपों को भी सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।" - मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

पीएम कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन (सौर ऊर्जाकरण) की प्रगति की भी समीक्षा की गई और इसे जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया ताकि किसानों को निरंतर बिजली मिल सके।

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