CEC और SIR के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, बघेल बोले- 'आंदोलन जारी रहेगा'

कांग्रेस के दिग्गज नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शन थमने वाले नहीं हैं। बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए बड़े प्रदर्शनों की तरह यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या नए संशोधनों के तहत चुनाव आयुक्त को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा के कारण ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी संभव है, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "सब कुछ संभव है।"
'वोट चोरी' को लेकर CWC की हाई-लेवल मीटिंग
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में कथित हेरफेर के खिलाफ रणनीति तैयार करना है। कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह ने बताया कि बैठक का केंद्र बिंदु देशभर से आ रही "वोट चोरी" की शिकायतें हैं।
जितेंद्र सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "देश के कोने-कोने से शिकायतें मिल रही हैं। कई ऐसे पोलिंग बूथ हैं जहाँ से मतदाता सूची में 90 प्रतिशत मतदाताओं के नाम गायब हो गए हैं। आज की चर्चा इसी गंभीर मुद्दे पर है।"
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का ह्रास तब शुरू हुआ जब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया बदल दी गई। उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है और प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त कैबिनेट मंत्री को इसमें शामिल कर लिया गया है।
चौधरी ने चुनाव आयुक्तों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि यह सुरक्षा राष्ट्रपति या राज्यों के राज्यपालों को उनके कार्यकाल के बाद मिलने वाली सुरक्षा से भी अधिक है। उन्होंने कहा, "चुनाव आयुक्त को दी गई यह सुरक्षा निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के बजाय एकतरफा चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य को पूरा कर रही है।"
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
हरीश चौधरी ने SIR अभियान के तहत फॉर्म-6 के उपयोग और मतदाता सूची के संशोधन को लेकर भी कानूनी आपत्तियां दर्ज कीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग के पास इस तरह के प्रबंध करने का अधिकार है?
"यह एक विधायी अधिकार है। केवल संसद ही इस अधिकार का प्रयोग कर सकती है, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे अपने हाथ में ले लिया है। यदि चुनाव आयोग का आईटी सेल ईआरओ (ERO) की शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है, तो क्या यह नियमों, संविधान और प्रक्रियाओं का उल्लंघन नहीं है?"
गौरतलब है कि CWC इस विषय पर एक प्रस्ताव पारित कर सकती है और आगे के विरोध प्रदर्शनों का आह्वान कर सकती है। साथ ही, कांग्रेस आज INDIA bloc के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर अपनी रणनीति पर भी