"क्या पीएम संसद में बताएंगे?" भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस का हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (India-US trade deal) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस समझौते की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हस्ताक्षर करने से पहले संसद को इसकी शर्तों के बारे में सूचित करेंगे?
अमेरिकी अधिकारियों से मिल रही जानकारी
सिंह देव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत के विवरण भारत सरकार के बजाय अमेरिकी अधिकारियों द्वारा साझा किए जा रहे हैं।
"अच्छी खबर है भारत के लिए। हमारा व्यापार समझौता लगभग पूरा हो चुका है। हमें यह कैसे पता चला? संसद से नहीं। हमारी अपनी सरकार से नहीं। हमने इसे मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक अमेरिकी विदेश मंत्री से सुना।"
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी अधिकारी न केवल व्यापार, बल्कि भारत के कच्चे तेल की खरीद और रक्षा सौदों के बारे में भी अपडेट दे रहे हैं। सिंह देव ने तंज कसते हुए कहा, "हमारी सरकार को इससे नोट्स लेने चाहिए।"
किसानों और आम जनता पर असर का डर
कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि यह समझौता केवल आर्थिक आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश के विभिन्न वर्गों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एक व्यापार समझौता निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं को तय करता है:
- किसानों की आय: यह तय करेगा कि किसानों को उनकी फसलों का क्या दाम मिलेगा।
- छोटे निर्माता: यह छोटे निर्माताओं के मुनाफे के मार्जिन को प्रभावित करेगा।
- आम परिवार: ईंधन की लागत और घरेलू खर्चों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
सिंह देव ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि देश की महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक जानकारी किसी विदेशी मंत्री की 'ट्रैवल डायरी' से नहीं, बल्कि संसद के माध्यम से मिलनी चाहिए।
समझौते के बेहद करीब है अमेरिका
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि यह समझौता आने वाले कुछ हफ्तों में पूरा होने की उम्मीद है। रुबियो के अनुसार, हालांकि वे सीधे तौर पर बातचीत नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी की है और यह समझौता दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।