दरभंगा स्नातक चुनाव: पहले सर्वेश आगे, फिर अनिल झा ने मारी बाजी!

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अनिल कुमार झा ने भाजपा के सर्वेश कुमार को हराकर जीत दर्ज की। दूसरी वरीयता के वोटों ने पलटा पूरा समीकरण।

Ghazala Saheb29 October 20262 min read0 viewsBihar
दरभंगा स्नातक चुनाव: पहले सर्वेश आगे, फिर अनिल झा ने मारी बाजी!

बिहार की राजनीति में दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव परिणाम किसी रोमांचक टी-20 मैच के आखिरी ओवर की तरह रहा। मतगणना के दौरान पल-पल बदलते समीकरणों ने समर्थकों की सांसें थमी हुई थीं। लंबे इंतजार और उतार-चढ़ाव के बाद, अंततः दूसरी वरीयता के मतों ने पूरी तस्वीर बदल दी और राजद समर्थित प्रत्याशी अनिल कुमार झा को विजयी घोषित कर दिया गया।

पहली वरीयता में भाजपा का दबदबा

मतगणना के शुरुआती चरणों में मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी सर्वेश कुमार के पक्ष में झुकता नजर आ रहा था। बुधवार रात जब पहली वरीयता के मतों की गिनती पूरी हुई, तब सर्वेश कुमार 1,500 मतों की बढ़त के साथ आगे थे। आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • सर्वेश कुमार (भाजपा): 16,115 मत
  • अनिल कुमार झा (राजद समर्थित): 14,615 मत
  • मोहम्मद इम्तियाज नूरानी (जन सुराज): 10,227 मत

शुरुआती बढ़त के बावजूद, सर्वेश कुमार निर्धारित जीत का कोटा हासिल करने में विफल रहे, जिससे मुकाबले ने एक नया मोड़ ले लिया।

दूसरी वरीयता ने पलटा पूरा समीकरण

कुल 69,141 मतपत्रों में से 63,820 मत वैध पाए गए। इस चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए 31,911 मतों का कोटा निर्धारित था। चूंकि पहली वरीयता में किसी भी प्रत्याशी को यह कोटा नहीं मिला, इसलिए मतगणना दूसरी वरीयता के मतों की गणना तक पहुंची।

प्रक्रिया के तहत, कम मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशियों को बाहर किया गया और उनके मतपत्रों पर अंकित अगली वरीयता के अनुसार मतों का हस्तांतरण किया गया। इसी चरण में अनिल कुमार झा ने जबरदस्त वापसी की और अंततः जीत हासिल कर ली। तारडीह प्रखंड के ठेंगहा गांव के निवासी अनिल झा की इस जीत से उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया।

राजनीतिक तनाव और विवाद

मतगणना की लंबी प्रक्रिया और लगातार बदलते रुझानों के बीच राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा। मतगणना केंद्र पर कुछ एजेंटों को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद राजद खेमे में भारी नाराजगी देखी गई।

राजद नेताओं ने मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और आंदोलन की चेतावनी दी है। तेजस्वी यादव तथा पूर्व मंत्री ललित कुमार यादव ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़ी निगरानी रखी और चुनाव कर्मियों को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए थे।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

अनिल कुमार झा के लिए यह जीत महज एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है। ठेंगहा गांव से विधान परिषद तक का उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। इससे पहले भी उन्हें कई बार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।

स्थानीय स्तर पर उन्हें एक मिलनसार और जुझारू व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। चुनावी चर्चाओं के अनुसार, उन्हें केवल राजद समर्थित मतदाताओं का ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों का भी समर्थन प्राप्त हुआ, जो उनकी जीत का एक बड़ा कारण साबित हुआ।

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