दरभंगा के किसानों की चमकेगी किस्मत! औषधीय खेती को मिली मंजूरी
दरभंगा में औषधीय पौधों की क्लस्टर आधारित खेती को मंजूरी मिली है। जादवपुर विश्वविद्यालय की टीम जल्द करेगी सर्वे।

बिहार के दरभंगा जिले के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड ने जिले में 'एकीकृत औषधीय पादप विकास परियोजना' को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के माध्यम से अब दरभंगा में औषधीय खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा।
विशेषज्ञों की टीम करेगी जमीन पर उतरकर सर्वे
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय की एक विशेषज्ञ टीम जल्द ही दरभंगा का दौरा करेगी। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ डॉ. महेश कुमार दाधीच के निर्देश पर जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्वी क्षेत्रीय सुविधा केंद्र ने इस दिशा में पहल शुरू की है।
विशेषज्ञों की यह टीम जिले के विभिन्न प्रखंडों में जाकर स्थलीय सर्वेक्षण करेगी और स्थानीय किसानों से सीधा संवाद करेगी। टीम का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु और जल संसाधनों की उपलब्धता का बारीकी से अध्ययन करना है, ताकि यह तय किया जा सके कि किन क्षेत्रों में कौन सी औषधीय फसलें सबसे अधिक लाभदायक होंगी।
इन बेशकीमती औषधीय फसलों पर रहेगा जोर
परियोजना के तहत किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जिनकी औषधीय और व्यावसायिक मांग बहुत अधिक है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- अश्वगंधा और शतावरी
- तुलसी और गिलोय
- कालमेघ और सर्पगंधा
- ब्राह्मी, पिपली और लेमनग्रास
खेती के साथ-साथ किसानों को आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। योजना के तहत उन्नत नर्सरी, प्रसंस्करण (processing), ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन (marketing) की व्यवस्था विकसित करने की भी योजना है।
रोजगार और आय के नए अवसर
स्थानीय सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि इस पहल से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि यह क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार भी खोलेगी। इससे युवाओं, महिलाओं और कृषक उत्पादक संगठनों के लिए स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर सृजित होंगे। क्लस्टर आधारित खेती से किसानों को सामूहिक रूप से लाभ मिलेगा और उन्हें बाजार तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी।