दरभंगा में एनडीए की करारी हार, दिग्गज नेताओं के वर्चस्व पर उठे सवाल
दरभंगा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए की हार ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। जानें क्यों दिग्गज नेताओं के बावजूद एनडीए को मिली हार।

दरभंगा स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए के दोनों प्रत्याशियों की करारी हार ने बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इस हार के बाद एनडीए के भीतर मंथन और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहाँ एक ओर आरजेडी और जन सुराज के प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया, वहीं एनडीए के घटक दलों के कार्यकर्ता इस परिणाम से काफी आहत और निराश नजर आ रहे हैं।
शीर्ष नेतृत्व की सुस्ती बनी हार का कारण?
एनडीए के घटक दलों से जुड़े लोगों के बीच इस हार को लेकर गहरा असंतोष है। शुक्रवार को हुई चर्चाओं में कार्यकर्ताओं ने इस हार के लिए शीर्ष नेतृत्व की कथित अकर्मण्यता को जिम्मेदार ठहराया है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि जमीनी स्तर पर सही रणनीति और सक्रियता की कमी के कारण एनडीए को इस क्षेत्र में दोहरी हार का सामना करना पड़ा है।
दिग्गजों की मौजूदगी के बावजूद मिली हार
इस चुनाव परिणाम ने मिथिलांचल के कई कद्दावर नेताओं की राजनीतिक पकड़ पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जैसे क्षेत्रों में एनडीए के कई दिग्गज सांसद, मंत्री और विधायक मौजूद हैं।
हार के विश्लेषण के दौरान कुछ प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई:
- बेगूसराय और समस्तीपुर: बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का दबदबा है, वहीं समस्तीपुर में लोजपा सांसद शांभवी और भाजपा के केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय का प्रभाव है।
- दरभंगा और मधुबनी: दरभंगा में भाजपा सांसद गोपाल जी ठाकुर और मधुबनी में भाजपा सांसद अशोक यादव जैसे कद्दावर नेता मौजूद हैं।
- झंझारपुर: यहाँ जदयू सांसद रामप्रीत मंडल का प्रभाव रहता है।
इन तमाम बड़े नामों के बावजूद, दरभंगा के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका, जिसे राजनीतिक गलियारों में शर्मनाक माना जा रहा है।
संजय झा की प्रतिष्ठा पर सवालिया निशान
इस हार का सबसे बड़ा असर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की प्रतिष्ठा पर माना जा रहा है। दरभंगा उनका गृह क्षेत्र है और उनके नेतृत्व में जदयू प्रत्याशी को महज 823 वोट ही प्राप्त हुए। वहीं, भाजपा के उम्मीदवार सर्वेश कुमार दूसरे स्थान पर रहे।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि:
"संजय झा के गृह क्षेत्र में एनडीए के दोनों उम्मीदवारों का हार जाना न केवल पार्टी के लिए नुकसानदेह है, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत प्रभाव और प्रतिष्ठा पर भी सवालिया निशान लगाता है।"
इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर अन्य नेताओं की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई जा रही है। मधुबनी की विधायक लेसी सिंह, समस्तीपुर के उप मुख्य मंत्री विजय चौधरी और अन्य स्थानीय मंत्रियों की सक्रियता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि वे इस महत्वपूर्ण चुनाव में प्रभावी भूमिका क्यों नहीं निभा सके।
कुल मिलाकर, दरभंगा में एनडीए की यह हार केवल एक चुनावी परिणाम नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भीतर के तालमेल और बड़े नेताओं के प्रभाव की कमी को भी उजागर करती है।