दरभंगा: प्रधानमंत्री आवास योजना सूची समीक्षा शुरू, असली हकदारों की तलाश

दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड में बीडीओ के निर्देश पर प्रधानमंत्री आवास योजना सूची समीक्षा का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना है, जिनका नाम योजना की सूची से गलत तरीके से हटा दिया गया है या जो पात्र होने के बावजूद वंचित रह गए हैं।
गरीब परिवार छप्पर के नीचे रहने को मजबूर
समीक्षा के दौरान आवास सहायक मनोज शर्मा ने मदरिया गांव का दौरा किया, जहां उन्होंने एक हृदयविदारक स्थिति देखी। वहां रहने वाली संगीता देवी का परिवार आज भी फूस के छप्पर के नीचे रहने को मजबूर है। संगीता देवी के पति की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है, जिससे परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
मौके पर स्थिति का जायजा लेने के बाद आवास सहायक ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के इतने निचले पायदान पर रहने वाले और आवासविहीन परिवार का नाम अंतिम सूची में न होना एक बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बीडीओ के निर्देशानुसार वे ईमानदारी से असली लाभार्थियों को चिह्नित करेंगे।
धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
इस मामले में भ्रष्टाचार और अनियमितता के भी बड़े आरोप लग रहे हैं। संगीता देवी ने सीधा आरोप लगाया है कि उनके आसपास रहने वाले कई लोग, जिनके पास पहले से ही पक्के मकान हैं, उन्हें आवास योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका नाम इसलिए काट दिया गया क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर किसी को 'सुविधा शुल्क' या रिश्वत नहीं दी थी।
ग्रामीणों ने इस मामले में कुछ और गंभीर बातें भी सामने रखी हैं:
- प्रभावशाली लोगों का दबाव: ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत समिति सदस्यों और मुखिया जैसे प्रभावशाली लोगों के दबाव में सूची तैयार की गई है।
- महादलित परिवारों की अनदेखी: प्रखंड के कई महादलित परिवारों का नाम भी इस सूची में शामिल नहीं पाया गया है।
- आर्थिक संपन्न लोगों को लाभ: आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के नाम सूची में होने से स्थानीय लोगों में भारी असंतोष है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। भाजपा महिला मोर्चा की बिहार प्रवक्ता सुलेखा झा ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आवास आवंटन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में पात्र लोगों की सूची सही तरीके से तैयार की जाती, तो समाज के गरीब परिवारों को इस तरह अपमानित नहीं होना पड़ता।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन द्वारा की जा रही इस निष्पक्ष समीक्षा के बाद क्या वास्तव में उन गरीबों को उनका हक मिल पाता है, जो लंबे समय से एक पक्के छत का इंतजार कर रहे हैं।