कटिहार में लगेगी 'बिहार केसरी' की प्रतिमा, महासभा ने उठाई मांग
कुर्मी क्षत्रिय महासभा ने कटिहार प्रशासन से बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की प्रतिमा शहर के प्रमुख स्थल पर लगाने की मांग की है।

बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री और 'बिहार केसरी' डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर कटिहार में उनकी प्रतिमा स्थापित करने की मांग उठी है। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा, जिला शाखा कटिहार ने इस संबंध में जिला प्रशासन को एक मांग पत्र सौंपा है।
महासभा ने आग्रह किया है कि शहर के किसी प्रमुख स्थल पर डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की प्रतिमा स्थापित की जाए ताकि उनके ऐतिहासिक योगदान को सम्मान मिल सके।
नई पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा
महासभा के शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे अपर लोक अभियोजक (एपीपी) विनोद कुमार और अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासन से इस मांग पर जल्द विचार करने को कहा है। पदाधिकारियों का कहना है कि:
- डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने आधुनिक बिहार के निर्माण और सामाजिक समरसता में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
- नई पीढ़ी को उनके विचारों और संघर्षों से अवगत कराने के लिए जिले में उनकी प्रतिमा का होना अत्यंत आवश्यक है।
संगठन ने प्रशासन से प्रतिमा स्थापना की प्रशासनिक प्रक्रिया और उचित स्थल के चयन को जल्द से जल्द शुरू करने की अपील की है।
कौन थे डॉ. श्रीकृष्ण सिंह?
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का जीवन बिहार के इतिहास में एक मील का पत्थर है। उनके योगदान और जीवन से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
21 अक्टूबर 1887 को जन्मे डॉ. श्रीकृष्ण सिंह स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के प्रमुख सहयोगियों में से एक थे। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलनों के दौरान करीब आठ वर्ष जेल में बिताए थे।
मुख्यमंत्री के रूप में ऐतिहासिक उपलब्धियां
वे 1937 और फिर 1946 से लेकर 31 जनवरी 1961 तक लगातार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल की कुछ बड़ी उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:
- जमींदारी उन्मूलन: उनके मुख्यमंत्रित्व काल में देश में सबसे पहले जमींदारी उन्मूलन कानून लागू कराया गया।
- सामाजिक सुधार: उन्होंने देवघर के बैद्यनाथ धाम मंदिर में दलितों के प्रवेश के लिए ऐतिहासिक नेतृत्व किया।
- औद्योगिकीकरण की नींव: उन्होंने बरौनी रिफाइनरी और सिंदरी खाद कारखाना जैसी विशाल औद्योगिक इकाइयों की स्थापना कर बिहार के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी।