रासायनिक खाद से घट रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति, देसी गाय का गोबर है समाधान
कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रासायनिक खाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। प्राकृतिक खेती और देसी गाय के गोबर से मिट्टी को बचाएं।

बेतिया के लौरिया प्रखंड में आयोजित 'रवि महाअभियान' के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को चेतावनी दी कि रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड प्रमुख शंभु तिवारी, सहकारिता पदाधिकारी संजीव कुमार, पशु चिकित्सक मुकेश कुमार और कृषि पदाधिकारी केशव किशोर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
रासायनिक खाद और पराली से बढ़ रहा है खतरा
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सौरभ दुबे ने किसानों को आगाह किया कि रासायनिक खाद, कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग और पराली जलाने की प्रवृत्ति मिट्टी के लिए बेहद घातक है। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है और उसमें मौजूद लाभकारी मित्र जीवाणु भी नष्ट हो रहे हैं।
देसी गाय के गोबर में छिपा है समाधान
मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए डॉ. दुबे ने प्राकृतिक खेती अपनाने की पुरजोर सलाह दी। उन्होंने बताया कि देसी गाय पालना और उसके गोबर का उपयोग करना मिट्टी के लिए वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, "एक ग्राम देसी गाय के गोबर में करोड़ों लाभकारी बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो मिट्टी को पुनर्जीवित करने में सक्षम हैं।" इसके अलावा, कीटनाशकों के एक सुरक्षित विकल्प के रूप में गोमूत्र के उपयोग का सुझाव भी दिया गया।
किसानों की समस्याएं और धान की पैदावार
प्रखंड प्रमुख शंभु तिवारी ने क्षेत्र की कृषि स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि अत्यधिक बारिश और भीषण बाढ़ की चुनौतियों के बावजूद धान की अच्छी उपज होना किसानों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे खेती से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए विशेषज्ञों से परामर्श जरूर लें।
कार्यक्रम के दौरान जिला पार्षद प्रतिनिधि आशुतोष मल्ल ने किसानों की एक गंभीर समस्या को भी उठाया। उन्होंने बताया कि रामनगर चीनी मिल द्वारा असमय टेमा (पानी) छोड़ने के कारण स्थानीय किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस कार्यक्रम का सफल संचालन कृषि समन्वयक अशोक कुमार पांडेय द्वारा किया गया।