मतदाता सूची संशोधन पर बोले फडणवीस: 'यह एक पुरानी और जरूरी प्रक्रिया है'

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर उठ रहे सवालों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई नई या संदिग्ध गतिविधि नहीं है, बल्कि एक व्यापक और लंबे समय से चली आ रही नियमित प्रक्रिया का अगला चरण है। फडणवीस के अनुसार, मतदाता डेटा को सटीक और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए यह एक स्थापित अभ्यास है।
दशकों से चली आ रही है यह परंपरा
देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत की चुनावी प्रणाली में मतदाता सूची का गहन संशोधन दशकों पुराना है। उन्होंने ऐतिहासिक आंकड़ों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने समय-समय पर मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए कई बार गहन संशोधन किए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रक्रिया का इतिहास काफी पुराना है:
- 1952 से 1956 के बीच: देश के अधिकांश हिस्सों में गहन संशोधन किए गए थे।
- अन्य महत्वपूर्ण वर्ष: इसके बाद 1957, 1961, 1965 और 1966 में भी यह प्रक्रिया अपनाई गई।
- 80 और 90 का दशक: 1983-84, 1987-89, 1992, 1993 और 1995 के दौरान भी संशोधन हुए।
- हालिया दौर: साल 2002, 2003 और 2004 में भी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट किया था।
उन्होंने समझाया कि गहन संशोधन में घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी एकत्र करना, फॉर्म वितरित करना और मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन करना शामिल होता है, जिससे मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार किया जाता है।
बदलते समाज और शहरीकरण की चुनौती
फडणवीस ने तर्क दिया कि पिछले दो दशकों में हुए बड़े बदलावों के कारण यह प्रक्रिया अनिवार्य हो गई है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और नागरिकों के पलायन (migration) की वजह से मतदाता सूचियों में बड़े बदलाव आए हैं।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, "पिछले 20 वर्षों में, मतदाता सूचियों में बड़ी संख्या में नाम जोड़े गए हैं और हटाए गए हैं। नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण, मृत्यु, पलायन और एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण के कारण मतदाता सूची में लगातार बदलाव होते रहते हैं। इसलिए, समय-समय पर गहन सत्यापन करना अत्यंत आवश्यक है।"
विपक्ष का विरोध और राजनीतिक विवाद
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। विपक्षी दलों ने इस संशोधन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हाल ही में, शिव सेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने एक संयुक्त विरोध मार्च निकाला था। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए बीएमसी मुख्यालय की ओर कूच किया था। विपक्ष का आरोप है कि इस संशोधन प्रक्रिया में अनियमितताएं हो सकती हैं।
विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के भीतर ही कुछ महत्वपूर्ण फाइलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता का समर्थन किया है।