"लड़ाई के दिन अब खत्म": मेकेडतु बांध पर डीके शिवकुमार की तमिलनाडु को बड़ी अपील
कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने मेकेडतु जलाशय मुद्दे पर तमिलनाडु के सीएम से सहयोग और एकता की अपील की है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मेकेडतु जलाशय (Mekedatu Reservoir) के मुद्दे पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से सहयोग और एकजुटता की भावुक अपील की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतरराज्यीय जल विवादों के दिन अब बीत चुके हैं और अब समय मिलकर काम करने का है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि कर्नाटक पूरी तरह से भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनी ढांचे के भीतर काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को सालाना 177 TMC कावेरी जल छोड़ने का आदेश दिया है, और कर्नाटक इस शर्त का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
"मुझे उम्मीद है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री देश के कानून को समझते हैं। इसके लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही अनुमति दे दी है कि कर्नाटक अपने अधिकार क्षेत्र में बांध बना सकता है। शर्त बस इतनी है कि हमें 177 TMC पानी देना होगा, और हम उस पर कायम हैं।"
दोनों राज्यों के लिए वरदान बनेगा मेकेडतु
शिवकुमार ने तर्क दिया कि मेकेडतु जलाशय केवल कर्नाटक के हित में नहीं है, बल्कि यह एक 'बैलेंसिंग जलाशय' के रूप में काम करेगा जिससे दोनों राज्यों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के दौरान यह सिस्टम दोनों राज्यों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा और वास्तव में तमिलनाडु को इससे अधिक लाभ मिलेगा।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ठोस कदम
पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए कर्नाटक सरकार ने पहले ही बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि:
- क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के लिए लगभग 5400 हेक्टेयर वन भूमि की पहचान कर ली गई है।
- इस भूमि को वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।
- पर्यावरण संबंधी सभी कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकता की पुकार
शिवकुमार ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से एक टीम भेजने का आग्रह किया ताकि वे स्वयं देख सकें कि पानी का भंडारण किया जा रहा है और इसका दुरुपयोग नहीं होगा। उन्होंने यह भी साझा किया कि कर्नाटक में राजनीतिक मतभेद भुलाकर भाजपा और एनडीए के नेता भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर राज्य के पक्ष में खड़े हैं।
उन्होंने कावेरी नदी को एक 'राष्ट्रीय उपहार' बताते हुए कहा कि यह नदी केवल दो राज्यों की नहीं, बल्कि कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल के किसानों, उद्योगों और आम जनता की जीवनरेखा है। उन्होंने अपील की कि दोनों राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि किसानों की खुशहाली सुनिश्चित की जा सके और पानी का सही बंटवारा हो सके।