'कन्नड़ राज्योत्सव है जरूरी': दिल्ली के विरोध प्रदर्शन से दूरी बनाएंगे डीके शिवकुमार

कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार कन्नड़ राज्योत्सव के कारण दिल्ली में होने वाले इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे।

Ghazala Saheb30 October 20262 min read0 viewsBihar
'कन्नड़ राज्योत्सव है जरूरी': दिल्ली के विरोध प्रदर्शन से दूरी बनाएंगे डीके शिवकुमार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की है कि वह 1 नवंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। मुख्यमंत्री ने इस निर्णय के पीछे राज्य में होने वाले कन्नड़ राज्योत्सव के महत्वपूर्ण समारोहों को मुख्य कारण बताया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के कार्यकर्ता और नेता इस विरोध प्रदर्शन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

राज्योत्सव को लेकर विशेष निर्देश

मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक में कन्नड़ राज्योत्सव को बहुत ही विशेष और भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के सभी जिला मंत्रियों और विधायकों को विशेष निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा:

  • सभी जिला मंत्री अपने संबंधित जिलों में कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
  • विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।
  • विधायकों को निर्देश दिया गया है कि वे जहां भी उत्सव मना रहे हैं, वहां सरकारी योजनाओं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएं।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार के लिए राज्य की सांस्कृतिक पहचान और उत्सवों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, इसलिए वे स्वयं दिल्ली नहीं जा पाएंगे।

नेताओं की भागीदारी और स्वास्थ्य संबंधी कारण

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हालांकि वे और अन्य मंत्री दिल्ली नहीं जा रहे हैं, लेकिन पार्टी के जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों और ट्रेन यात्रा की कठिनाइयों के बावजूद, पार्टी कार्यकर्ता इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।

उन्होंने एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि मंत्री परमेस्वर का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। उनकी अनुपस्थिति में, कृष्णा बायरे गौड़ा ध्वजारोहण के कार्यक्रम में शामिल होकर उनकी जिम्मेदारी संभालेंगे।

दूध की कीमतों और किसानों के मुद्दों पर स्पष्टीकरण

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कर्नाटक में दूध की कीमतों में हाल ही में हुई वृद्धि पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि कीमतों में 6-7 रुपये की वृद्धि काफी लंबे समय के बाद की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  1. कीमतों में हुई वृद्धि का अधिकांश हिस्सा सीधे किसानों को मिलेगा।
  2. केवल 1 रुपये का उपयोग प्रबंधन खर्चों के लिए किया जाएगा।
  3. अन्य राज्यों की तुलना में कर्नाटक में दूध की कीमतें अभी भी कम हैं।

इसके अलावा, उन्होंने किसानों को फसल नुकसान के मुआवजे और गन्ने की कीमतों से जुड़ी चिंताओं पर भी आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार फसल नुकसान की भरपाई के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों की जांच कर रही है। गन्ने के मुद्दे पर उन्होंने अपील की कि किसान धैर्य बनाए रखें और सरकार व केंद्र सरकार के निर्णयों का सहयोग करें, क्योंकि सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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