किशनगंज: ड्रैगन फ्रूट की खेती से चमकेगी किसानों की किस्मत, प्रशिक्षण संपन्न

किशनगंज में ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा हुआ। किसानों को आधुनिक तकनीक और आय बढ़ाने के नए तरीके सिखाए गए।

Ghazala Saheb31 October 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज: ड्रैगन फ्रूट की खेती से चमकेगी किसानों की किस्मत, प्रशिक्षण संपन्न

किशनगंज स्थित डॉ. कलाम कृषि कॉलेज में 'ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती' पर आयोजित पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। दरभंगा स्थित ATMA द्वारा प्रायोजित इस विशेष कार्यक्रम में दरभंगा जिले के 25 प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक उत्पादन तकनीकों से लैस करना और फसल विविधीकरण के जरिए उनकी आय बढ़ाने के नए रास्ते दिखाना है।

खेती की बारीकियों से रूबरू हुए किसान

पांच दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती के हर महत्वपूर्ण पहलू पर विस्तार से जानकारी दी। किसानों को निम्नलिखित विषयों पर व्यावहारिक और वैज्ञानिक ज्ञान प्रदान किया गया:

  • मिट्टी और जलवायु का चयन: ड्रैगन फ्रूट के लिए उपयुक्त मिट्टी और मौसम की जानकारी।
  • उन्नत किस्में और रोपण: बेहतर किस्मों की पहचान, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का चुनाव और प्रसार (propagation) की विधियां।
  • खेत की तैयारी: पौधों के बीच सही दूरी, खेत की तैयारी और सहारा देने वाली संरचनाओं (support structures) का निर्माण।
  • देखभाल और प्रबंधन: सिंचाई के वैज्ञानिक तरीके, जल प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्व और जैविक खाद का उपयोग।
  • सुरक्षा और कटाई: खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन, छंटाई (pruning), फूल और फल प्रबंधन, तथा कटाई के बाद गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीक।

आय बढ़ाने के लिए मार्केटिंग पर भी जोर

प्रशिक्षण में केवल खेती तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों को इस फसल की मार्केटिंग रणनीतियों के बारे में भी बताया गया। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि यदि सही तकनीकी प्रबंधन और उच्च गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री का उपयोग किया जाए, तो ड्रैगन फ्रूट की खेती एक बेहद लाभदायक व्यावसायिक गतिविधि बन सकती है।

किसानों को मिला पौधों का उपहार

कार्यक्रम के समापन पर एक उत्साहजनक कदम उठाते हुए, सभी 25 प्रतिभागी किसानों को ड्रैगन फ्रूट के पौधे उपहार स्वरूप दिए गए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को तुरंत अपने खेतों में लागू कर सकें।

कॉलेज के एसोसिएट डीन-कम-प्रिंसिपल ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि टिकाऊ और लाभदायक कृषि के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया और आग्रह किया कि वे इस ज्ञान को अन्य किसान भाइयों के साथ भी साझा करें।

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