चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: 17 राज्यों में मतदाता सूची का होगा पुनरीक्षण

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने इन क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष सारांश पुनरीक्षण (Special Summary Revision - SSR) की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता पंजीकरण से वंचित न रह जाए। यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत शुरू की जा रही है।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगी प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस चरण में निम्नलिखित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है:
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- असम
- बिहार
- छत्तीसगढ़
- गोवा
- गुजरात
- केरल
- लक्षद्वीप
- मध्य प्रदेश
- मणिपुर
- पुडुचेरी
- पंजाब
- राजस्थान
- तमिलनाडु
- उत्तर प्रदेश
- उत्तराखंड
- पश्चिम बंगाल
आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों के लिए, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है या हाल ही में समाप्त हुआ है, उनका कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा। वहीं हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बाद में सूचना दी जाएगी।
महत्वपूर्ण तिथियां और समय सीमा
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए एक सख्त समय सीमा तय की गई है। इस प्रक्रिया के तहत मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
- 2 नवंबर: पोलिंग स्टेशनों का युक्तिकरण (Rationalisation) पूरा किया जाएगा।
- 12 नवंबर: ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
- 11 दिसंबर तक: मतदाता सूची में नाम जोड़ने या सुधार के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि।
- 28 दिसंबर: सभी प्राप्त दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा।
- 4 जनवरी, 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी, 2027 को अर्हता तिथि (Qualifying Date) माना जाएगा।
अधिकारियों पर सख्त निगरानी और निर्देश
निर्वाचन आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को कड़े निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि:
- मुख्य सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि मतदाता सूची तैयार करने में लगे सभी अधिकारियों (CEO, DEOs, EROs, AEROs, BLOs आदि) को पर्याप्त जनशक्ति और संसाधन उपलब्ध हों।
- पुनरीक्षण की अवधि के दौरान DEO, ERO या AERO के किसी भी पद को रिक्त नहीं रखा जाएगा।
- ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन से लेकर अंतिम रोल के प्रकाशन तक, आयोग की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी संबंधित अधिकारी का तबादला नहीं किया जाएगा। यदि तबादला अनिवार्य हो, तो आयोग को पूर्ण स्पष्टीकरण के साथ प्रस्ताव भेजना होगा।
आयोग ने निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को विशेष रूप से जिम्मेदार ठहराया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र नागरिक सूची से छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो सके। आयोग ने जोर देकर कहा है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति का नामांकन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।