चुनाव आयोग में खींचतान की खबरें 'दुर्भाग्यपूर्ण', पूर्व कमिश्नर ने दिया समाधान का मंत्र

पूर्व चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने चुनाव आयोग के भीतर चल रही कथित खींचतान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर आयोग के भीतर मतभेदों की जो खबरें सामने आ रही हैं, उन्हें रावत ने "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया है।
वैश्विक साख पर उठते सवाल
हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची के नियमों से संबंधित निर्णयों पर कई बार आपत्ति जताई है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश रावत ने कहा कि चुनाव आयोग एक ऐसी संस्था है जिसकी दुनिया भर में निष्पक्ष, स्वतंत्र और विश्वसनीय चुनाव कराने की जबरदस्त प्रतिष्ठा है।
"यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसा कभी नहीं होना चाहिए क्योंकि चुनाव आयोग की वैश्विक स्तर पर एक साख है। इसलिए, इस विवाद को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को तुरंत एक साथ बैठकर सुलझा लेना चाहिए।"
प्रक्रियात्मक खामियां और पश्चिम बंगाल का मुद्दा
SIR प्रक्रिया और मतदाताओं को जारी किए गए नोटिसों पर उठ रहे सवालों के बीच, रावत ने स्वीकार किया कि शुरुआत से ही प्रक्रिया में कुछ खामियां रही हैं, जो अदालत के संज्ञान में भी आई हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आयोग ने धीरे-धीरे इन प्रक्रियाओं में सुधार किया है।
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में अपीलीय न्यायाधिकरण के एक फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा:
- पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं को हटाया गया, उनमें से 93 प्रतिशत वास्तविक मतदाता थे।
- मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित करना "आपराधिक लापरवाही" की श्रेणी में आता है।
- चुनाव आयोग को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
छवि बचाने के लिए 'प्रेस कॉन्फ्रेंस' की सलाह
पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों द्वारा 14 बार आपत्ति जताए जाने की खबरों पर रावत ने एक ठोस समाधान सुझाया। उन्होंने कहा कि संस्था की छवि को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए तीनों आयुक्तों को एक साथ बैठना चाहिए।
उनके सुझावों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- तीनों आयुक्तों को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करनी चाहिए।
- सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए ताकि भ्रम दूर हो सके।
- इससे आयोग की छवि को और अधिक धूमिल होने से बचाया जा सकेगा।
पारदर्शिता ही एकमात्र रास्ता
रावत ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों का काम विरोध करना और आपत्तियां दर्ज कराना है, लेकिन चुनाव आयोग की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि उसकी प्रक्रियाएं पारदर्शी, निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी के साथ भी अन्याय न हो।