विकसित भारत के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जरूरी: नीति आयोग

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को एक रणनीतिक जरूरत बताया गया है। नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की कार्यशाला में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि स्वच्छ परिवहन की ओर वैश्विक बदलाव तेजी से हो रहा है और यह देश के लिए आर्थिक व पर्यावरणीय रूप से जरूरी है। इस कार्यशाला में भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट का दूसरा संस्करण भी जारी किया गया।
वैश्विक और घरेलू आंकड़े
दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। साल 2025 में अमेरिका में नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी लगभग दसवां हिस्सा रही, यूरोपीय संघ में यह एक चौथाई से अधिक और चीन में आधे से ज्यादा रही। भारत के लिए कच्चे तेल की भारी आयात निर्भरता इसका मुख्य कारण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 89 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। वाहन बढ़ने के साथ यह निर्भरता और बढ़ने की आशंका है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर और सरकारी योजनाएं
घरेलू ऑटोमोबाइल सेक्टर सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7.1 प्रतिशत का योगदान देता है। यह सेक्टर करीब 1.9 करोड़ नौकरियां भी देता है। दिल्ली जैसे शहरों में वाहनों के प्रदूषण से होने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य लागत को कम करने के लिए वैश्विक रुझानों के साथ चलना जरूरी है। केंद्र सरकार ने फेम, पीएम ई-ड्राइव और पीएम ई-बस सेवा जैसी पहलों के तहत 92,000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यों की नीतियां
देश के 36 में से 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी अलग ईवी नीतियां बनाई हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और निजी कंपनियों द्वारा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जा रहा है। नया यूनिफाइड भारत ई-चार्ज ऐप जनता की पहुंच और सुविधा को बेहतर बनाएगा। इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में सबसे अधिक राज्य का स्कोर 77 से बढ़कर 84 हो गया है।