एस्सार पोर्ट्स को मिला 2,276 करोड़ का ट्यूना टेकरा प्रोजेक्ट

दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA), कांडला ने ट्यूना टेकरा में एक मल्टी-पर्पस कार्गो टर्मिनल विकसित करने के लिए एस्सार पोर्ट्स लिमिटेड को 'लेटर ऑफ अवार्ड' (LoA) जारी किया है। 2,276 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड के तहत 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (BOT) आधार पर लागू किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट अगले 30 वर्षों के लिए दिया गया है, जो भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
समुद्री व्यापार को मिलेगी नई मजबूती
वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से एस्सार पोर्ट्स लिमिटेड सबसे ऊंची बोली लगाने वाला बनकर उभरा है। कंपनी दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी को प्रति टन 61 रुपये की रॉयल्टी का भुगतान करेगी। यह नया टर्मिनल ट्यूना टेकरा में डीपी वर्ल्ड द्वारा विकसित किए जा रहे मेगा कंटेनर टर्मिनल के पूर्वी हिस्से में बनाया जाएगा।
पोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, इस टर्मिनल के विकसित होने से डीपीए की मल्टीपर्पस कार्गो हैंडलिंग क्षमता में भारी वृद्धि होगी। इससे घरेलू और आयात-निर्यात (EXIM) व्यापार के दीर्घकालिक विकास को भी काफी सहारा मिलेगा।
प्रोजेक्ट की लागत और तकनीकी क्षमता
इस विशाल परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2,276.06 करोड़ रुपये है। इसमें निवेश का विवरण इस प्रकार है:
- एस्सार पोर्ट्स का निवेश: 1,552.57 करोड़ रुपये
- डीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी का योगदान: 723.49 करोड़ रुपये
परियोजना की तकनीकी विशिष्टताएं इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाती हैं:
- वार्षिक क्षमता: यह टर्मिनल सालाना 18.33 मिलियन टन कार्गो संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- बर्थ की सुविधा: इसमें चार बर्थ होंगे, जिनमें से प्रत्येक की लंबाई 300 मीटर होगी, जिससे कुल बर्थ लंबाई 1,200 मीटर हो जाएगी।
- बड़े जहाजों के लिए उपयुक्त: यह बुनियादी ढांचा 1,70,000 डेडवेट टन (DWT) तक के केप-साइज जहाजों को संभालने में सक्षम होगा, जिसमें 18 मीटर तक का ड्राफ्ट उपलब्ध होगा।
परियोजना के तहत डीपीए एक्सेस चैनल की ड्रेजिंग, बर्थ पॉकेट, टर्निंग सर्कल और कॉमन अप्रोच रोड जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करेगा। वाणिज्यिक परिचालन 2031 तक शुरू होने की उम्मीद है।
विकास और रोजगार के नए अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास के एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। 'विकसित भारत' के विजन और पोर्ट-आधारित आर्थिक विकास के माध्यम से कांडला वैश्विक व्यापार के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है।
इस प्रोजेक्ट से कच्छ और गुजरात के क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और संबद्ध सेवाओं में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही, आधुनिक कार्गो हैंडलिंग सिस्टम और गहरे ड्राफ्ट वाले बुनियादी ढांचे से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा।