फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनने के आरोप में पांच लोगों की जांच शुरू, बंगाल में मचा हड़कंप

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने बिहार से कथित तौर पर फर्जी मेडिकल डिग्री और दस्तावेज हासिल कर राज्य में डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इनमें दो उत्तर 24 परगना और तीन दक्षिण 24 परगना जिले के बताए गए हैं और स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
शिकायत और प्रमुख आरोप
एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स ने स्वास्थ्य विभाग और पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। एसोसिएशन के सचिव राजीव पांडे ने आरोप लगाया कि इन पांच लोगों ने बिहार से हासिल फर्जी मेडिकल डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया है और एसोसिएशन ने यह भी दावा किया है कि इन पांचों में से कुछ से इलाज कराने वाले कई मरीजों की मौत हुई है तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं, विशेष रूप से ‘स्वास्थ्य साथी’, के संभावित दुरुपयोग की भी जांच की जानी चाहिए।
दस्तावेज और मांगें
राजीव पांडे के अनुसार, एसोसिएशन को विभिन्न जिलों में समितियां गठित करने के दौरान इस मामले की जानकारी मिली और करीब एक दर्जन ऐसे लोगों के बारे में जानकारी सामने आई थी। एसोसिएशन ने विवादित मेडिकल डिग्री और पंजीकरण की विस्तृत जांच कराने, चिकित्सकीय लापरवाही और मरीजों की मौत के मामलों की जांच करने तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत किए गए भुगतान की समीक्षा करने की मांग की है।
अन्य संगठनों की प्रतिक्रिया
एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विस डॉक्टर्स के पूर्व महासचिव मानस गुमटा ने आरोपों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वेस्ट बंगाल डॉक्टर्स फोरम के अध्यक्ष कौशिक चाकी ने कहा कि आरोप सही साबित होने पर इसके सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेंगे और सर्विस डॉक्टर्स फोरम के महासचिव सजल विश्वास ने कहा कि फर्जी या अवैध पंजीकरण संख्या के आधार पर चिकित्सा करना बेहद गंभीर अपराध है।