फरक्का जल संधि का नवीनीकरण मंजूर नहीं, बिहार में गहरा रहा जलसंकट: संजय झा

जदयू नेता संजय झा ने फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस संधि से बिहार में जलसंकट और बाढ़ की समस्या बढ़ रही है।

Ghazala Saheb2 November 20263 min read0 viewsBihar
फरक्का जल संधि का नवीनीकरण मंजूर नहीं, बिहार में गहरा रहा जलसंकट: संजय झा

बिहार के लखीसराय में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के "फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद" कार्यक्रम के तीसरे चरण के दौरान राज्य के जल संकट को लेकर बड़ा मुद्दा गरमाया। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने स्पष्ट रूप से कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि का नवीनीकरण कतई मंजूर नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह संधि बिहार के हितों के साथ सीधा समझौता है।

बिहार के हितों की बलि चढ़ा रही है यह संधि

लखीसराय के टाउन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में संजय झा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह संधि बिहार के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रही है। उन्होंने कहा:

"1996 की यह संधि बिहार के हित में नहीं है। अगर भविष्य में कोई भी नई संधि होती भी है, तो उसमें वर्ष 2050 तक की बिहार की जल आवश्यकताओं को अनिवार्य रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है और हम एक गंभीर जल-संकट की ओर बढ़ रहे हैं।"

संजय झा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन केंद्र और बिहार की सरकारों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन्होंने कहा कि इस संधि के कारण शुष्क मौसम में न केवल गंगा, बल्कि बिहार की अन्य आंतरिक नदियों का पानी भी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। इसका सीधा असर बिहार के किसानों की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, उद्योगों की जरूरतों और लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है।

बाढ़ और सूखे का दोहरा संकट

कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने भी फरक्का बराज और जल संधि से होने वाले दोहरे नुकसान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:

  • बाढ़ की समस्या: फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी मात्रा में गाद (silt) जमा हो रही है, जिससे नदी का तल ऊँचा हो गया है। यही कारण है कि बिहार को हर साल भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ता है।
  • सूखे की समस्या: जल संधि के तहत पानी का बँटवारा होने के कारण कई जिलों में सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है।

उमेश कुशवाहा ने जोर देकर कहा कि इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का लगभग 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार को उठाना पड़ रहा है, जो राज्य के साथ सरासर अन्याय है।

जन-जागरूकता अभियान का विस्तार

जदयू का यह संवाद कार्यक्रम बिहार के उन 12 जिलों को कवर कर रहा है जो इस संधि से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस अभियान के विभिन्न चरण इस प्रकार रहे हैं:

  1. पहला चरण: बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया।
  2. दूसरा चरण: सारण, वैशाली, समस्तीपुर और पटना।
  3. तीसरा चरण: लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार।

यह जन-जागरूकता अभियान 5 सितंबर को बक्सर से शुरू हुआ था और 4 नवंबर को कटिहार में संपन्न होगा। कार्यक्रम के दौरान एक विशेष डाॅक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई, ताकि लोग इस संधि के वास्तविक प्रभावों को समझ सकें। स्थानीय विधायक रामानंद मंडल और जिलाध्यक्ष रामानुज शर्मा ने कहा कि यह अभियान किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि बिहार के हक की लड़ाई लड़ने के लिए चलाया जा रहा है।

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