कर्तव्य और परंपरा: ड्यूटी के बीच करवा चौथ मना रही महिला पुलिसकर्मी
देशभर में महिला पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी और करवा चौथ के व्रत के बीच संतुलन बना रही हैं। पटना से फतेहपुर तक की खास खबरें यहाँ पढ़ें।

भारत के विभिन्न हिस्सों में महिला पुलिसकर्मी एक साथ दो बड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। एक तरफ जहां उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर वे 28 और 29 अक्टूबर 2026 को होने वाले करवा चौथ के पारंपरिक व्रत का पालन भी कर रही हैं।
पटना में ड्यूटी के साथ श्रृंगार का संगम
बिहार की राजधानी पटना से मिली जानकारी के अनुसार, महिला पुलिस अधिकारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी अपनी ड्यूटी पर तैनात रहीं। इस दौरान उन्होंने अपने त्योहार की परंपराओं को भी निभाया और मेहंदी लगाकर अपना श्रृंगार किया।
व्यस्त ड्यूटी से मिल रही है मदद
चंडीगढ़ में गृह विभाग की संयुक्त सचिव राधिका सिंह और पंचकूला की डीसीपी अदिति सिंह ने बताया कि पुलिस की चुनौतीपूर्ण और व्यस्त कार्यशैली उनके लिए मददगार साबित हो रही है। काम के अत्यधिक दबाव के कारण उन्हें प्यास या थकान का अहसास कम होता है, जिससे व्रत का पालन करना आसान हो जाता है।
इसी तरह, बरेली में जिला युवा कल्याण अधिकारी आरती जायसवाल और जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा ने भी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों और त्योहार की तैयारियों के बीच तालमेल बिठाया। उन्होंने ड्यूटी के साथ-साथ पारंपरिक खरीदारी और मेहंदी लगाने जैसे कार्यों को भी समय दिया।
फतेहपुर में मिली विशेष राहत
महिला पुलिसकर्मियों की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। उन्होंने 29 अक्टूबर को विवाहित महिला पुलिसकर्मियों, जो करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, उन्हें ड्यूटी से राहत देने का आदेश दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार करें ताकि कानून व्यवस्था को सुरक्षित रखते हुए वे अपनी परंपराओं का पालन कर सकें।
बिहार में बढ़ता करवा चौथ का क्रेज
समाजशास्त्री आशीष दासगुप्ता और फैशन डिजाइनर शिल्पी गोयल सिंह के अनुसार, बिहार में करवा चौथ की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालांकि ऐतिहासिक रूप से यह त्योहार पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक प्रचलित था, लेकिन प्रवास, लोकप्रिय संस्कृति और बदलते सामाजिक रुझानों के कारण अब यह बिहार में भी व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है।