उत्तराखंड हेलीकॉप्टर हादसा: पायलटों ने PM मोदी से मांगी नई सुरक्षा नीति
उत्तराखंड हादसे के बाद फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने PM मोदी को पत्र लिखकर देश में नेशनल हेलीकॉप्टर सेफ्टी फ्रेमवर्क बनाने की मांग की है।

उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे ने देश की विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 अक्टूबर को हथी पर्वत के पास हुए इस हादसे में कैप्टन हिमांशु सहबरवाल और पांच यात्रियों की जान चली गई थी। इस त्रासदी के बाद, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक तत्काल पत्र लिखकर देश में हेलीकॉप्टर संचालन की व्यापक समीक्षा करने और एक 'नेशनल हेलीकॉप्टर सेफ्टी फ्रेमवर्क' बनाने की मांग की है।
पायलटों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
FIP के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में भारत भर में हेलीकॉप्टर संचालन की तत्काल और गहन समीक्षा करने का आग्रह किया गया है। पायलटों का कहना है कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा सुरक्षा निरीक्षण को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।
पायलटों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एक समर्पित 'नेशनल हेलीकॉप्टर सेफ्टी रिव्यू कमेटी' गठित करने का प्रस्ताव दिया है। इस समिति में DGCA, AAIB, FIP, हेलीकॉप्टर ऑपरेटर और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि 90 दिनों के भीतर एक समयबद्ध कार्य योजना पेश की जा सके।
प्रशासनिक ढिलाई और 'जिम्मेदारियों का शून्य'
पायलटों ने तीर्थयात्रा उड़ानों के प्रबंधन में मौजूद खामियों पर भी कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) जैसे राज्य स्तरीय निकायों द्वारा किया जाने वाला विकेंद्रीकृत प्रबंधन एक "जिम्मेदारियों का शून्य" (responsibility vacuum) पैदा कर रहा है।
"पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ानों के लिए केवल लाइसेंस जारी करना पर्याप्त नहीं है; राष्ट्रीय नियामकों को सक्रिय और प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण सुनिश्चित करना चाहिए।"
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में कई उच्च-जोखिम वाले पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे सिंगल-इंजन वाले हेलीकॉप्टर इस्तेमाल किए जा रहे हैं जिनमें ऑटो-पायलट या मौसम रडार जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं नहीं हैं।
सुरक्षा के लिए क्या हैं पायलटों की प्रमुख मांगें?
हादसों को रोकने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने तकनीकी सुधारों की एक सूची पेश की है:
- बेहतर तकनीक: पहाड़ी क्षेत्रों में 'परफॉर्मेंस क्लास 3' हेलीकॉप्टरों के बजाय 'परफॉर्मेंस क्लास 1' हेलीकॉप्टर इस्तेमाल किए जाएं, जो ऑटो-पायलट, वेदर रडार और एन्हांस्ड विजन सिस्टम (EVS) से लैस हों।
- दो पायलटों की अनिवार्यता: कठिन मौसम और ऊंचे पहाड़ों में उड़ानों के लिए दो पायलटों की टीम होनी चाहिए, जिनके पास वर्तमान इंस्ट्रूमेंट रेटिंग (IR) हो।
- व्यावसायिक दबाव पर रोक: ऑपरेटरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यावसायिक लक्ष्यों या मौसमी दबाव के कारण पायलट की उड़ान रोकने के अधिकार का उल्लंघन न हो।
- कठोर प्रशिक्षण: पायलटों के लिए अनिवार्य माउंटेन-फ्लाइंग सर्टिफिकेशन और मानकीकृत ग्राउंड हैंडलिंग नियम लागू किए जाएं।
FIP ने नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ सीधे संवाद की मांग भी की है ताकि वे अपनी पेशेवर विशेषज्ञता के माध्यम से राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा में अपना योगदान दे सकें।