गंडक नदी में महाप्रलय का डर! 4.5 लाख क्यूसेक पानी की चेतावनी

Ghazala Saheb27 September 20262 min read2 viewsBihar
गंडक नदी में महाप्रलय का डर! 4.5 लाख क्यूसेक पानी की चेतावनी

नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश ने बिहार के सीमावर्ती इलाकों में तबाही का खतरा पैदा कर दिया है। पश्चिम चंपारण में गंडक नदी में बाढ़ का खतरा (Gandak River flood warning) मंडरा रहा है, जिससे स्थानीय प्रशासन और निवासियों की चिंता बढ़ गई है। नदी के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए संकट खड़ा कर दिया है।

कांग्रेस विधायक ने दी बड़ी चेतावनी

कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने रविवार को एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा कि नेपाल में हो रही भारी बारिश के कारण गंडक नदी का डिस्चार्ज रेट तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में नदी का डिस्चार्ज लगभग 3,00,000 क्यूसेक है, जिसके रविवार रात 10 बजे तक 4,50,000 क्यूसेक तक पहुँचने की आशंका है।

बचाव कार्य और लोगों का पलायन

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम चंपारण के निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। विधायक के अनुसार:

  • निचले इलाकों के लोगों को भेरीहारी जैसे सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
  • सरकार और स्वयंसेवकों द्वारा विस्थापित परिवारों के लिए भोजन और आश्रय की व्यवस्था की गई है।
  • प्रभावित लोगों के बीच सूखे राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है।

प्रशासन द्वारा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मुनादी (miking) भी कराई जा रही है ताकि लोग सतर्क रहें।

नेपाल में रेड अलर्ट और बिगड़ता मौसम

नेपाल के मौसम विभाग ने भी कई हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। काठमांडू में बागमती नदी के तटबंध टूटने से स्थिति और भी नाजुक हो गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और मौसम से जुड़ी अन्य आपदाएं आने की संभावना है, जिससे नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है।

सरकार की तैयारी और दीर्घकालिक रणनीति

इस संकट के बीच, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल तात्कालिक राहत पर ही नहीं, बल्कि बाढ़ से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति पर भी ध्यान दें। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:

  1. कोसी और गंडक नदी प्रणालियों का बेहतर प्रबंधन।
  2. नदियों में गाद (silt) प्रबंधन और नए बैराजों का निर्माण।
  3. गंडक नदी परियोजना के तहत तटबंधों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रबंधन के प्रयास केवल वार्षिक प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि एक ठोस और स्थायी योजना के तहत होने चाहिए।

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