गंडक की गाद से प्रभावित खेतों का होगा सर्वेक्षण, विधायक की पहल सफल
गंडक नदी की बाढ़ से खेतों में जमा बालू और गाद हटाने के लिए सरकार ने सर्वेक्षण के आदेश दिए हैं। विधायक की पहल पर प्रशासन सक्रिय।

पश्चिम चंपारण के किसानों के लिए राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है। गंडक नदी में इस साल आई भीषण बाढ़ के कारण कृषि योग्य भूमि पर जो भारी मात्रा में बालू, रेत और गाद जमा हो गई थी, अब उसे हटाने के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं। वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा की सक्रियता के बाद प्रशासन ने प्रभावित खेतों के सर्वेक्षण का आदेश दे दिया है।
विधायक की मांग पर सरकार ने लिया संज्ञान
गंडक नदी की बाढ़ ने इस साल पश्चिम चंपारण के कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में बालू और गाद के जमा होने से फसलों की बुवाई और खेती पर संकट मंडरा रहा था। इस गंभीर समस्या को वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समक्ष प्रमुखता से उठाया। विधायक के प्रयासों का असर यह हुआ कि आपदा प्रबंधन विभाग ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
एक सप्ताह के भीतर पूरा करना होगा सर्वेक्षण
आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव के आदेश के बाद, पश्चिम चंपारण के जिला कृषि पदाधिकारी ने सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को निम्नलिखित कार्य करने के लिए कहा गया है:
- स्थलीय सत्यापन: उन सभी कृषि भूमियों का मौके पर जाकर निरीक्षण करना जहाँ बालू और गाद का जमाव हुआ है।
- प्रभाव का आकलन: यह देखना कि जमाव के कारण खेती कितनी प्रभावित होने की आशंका है।
- समय सीमा: सर्वेक्षण पूरा करने के बाद एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट जिला कार्यालय को सौंपना।
NDRF और SDRF से मिलेगी मदद
इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य उन खेतों की पहचान करना है जहाँ खेती को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। एक बार जब प्रभावित भूमि का सत्यापन हो जाएगा, तो वहां जमा बालू, रेत और गाद को हटाने के लिए NDRF और SDRF के निर्धारित मानकों के तहत आवश्यक राशि की मांग की जाएगी।
इस आदेश की प्रतिलिपि सभी अंचल अधिकारियों, अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों और जिला पदाधिकारी को भी भेज दी गई है। प्रशासन का लक्ष्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके और उनकी कृषि भूमि को पुनः खेती योग्य बनाया जा सके।