पटना में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर, बिहार में बाढ़ राहत कार्य और बचाव अभियान तेज

बिहार में बाढ़ का संकट गहराने के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। रविवार, 6 सितंबर की सुबह 6 बजे पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी खतरे के निशान से 1.97 मीटर ऊपर बह रही थी। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, घाट पर जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जबकि आधिकारिक खतरा स्तर 48.60 मीटर है। हालांकि नदी का बहाव फिलहाल नीचे की ओर गिर रहा है।
बाढ़ रिकॉर्ड और क्षेत्रीय आंकड़े
गांधी घाट का उच्चतम बाढ़ स्तर 1975 की बाढ़ के दौरान 52.52 मीटर दर्ज किया गया था। केंद्रीय जल आयोग के बुलेटिन के अनुसार, पटना के दीघा घाट पर जलस्तर 50.45 मीटर के खतरे के निशान से 1.54 मीटर ऊपर यानी 51.99 मीटर दर्ज किया गया। श्रीपालपुर में नदी खतरे के स्तर से 2.82 मीटर ऊपर थी। बक्सर में जलस्तर खतरे के निशान से दस सेंटीमीटर ऊपर और फरक्का में 98 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। Kursela में कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 1.16 मीटर ऊपर था।
राहत और बचाव कार्य
संकट से निपटने के लिए राज्य अधिकारियों ने 33 आपदा टीमों को तैनात किया है। इसमें 6 राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF की यूनिट और 27 राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF की टीमें शामिल हैं। लगभग 700 सरकारी नावें बचाव कार्य में जुटी हैं। भागलपुर, भोजपुर, पटना और वैशाली सहित कई जिलों में सामुदायिक रसोई और अस्थायी राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
यात्रा और सुरक्षा सावधानियां
उच्च जलस्तर के कारण रेलवे परिचालन प्रभावित हुआ है, जिससे कई ट्रेनें रद्द और डायवर्ट की गई हैं। यात्रियों को सोशल मीडिया की अफवाहों के बजाय हेल्पलाइन 139 का उपयोग करने की सलाह दी गई है। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने परिवारों से जरूरी दस्तावेज, दवाइयां और मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर ले जाने की अपील की है। बहते पानी में न चलने और बाढ़ के पानी से छुए गए खाद्य पदार्थों को फेंकने की सलाह दी गई है।